वाशिंगटन/इस्लामाबाद | दुनिया एक बार फिर भीषण सैन्य टकराव की कगार पर खड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा कदम उठाते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की घेराबंदी करने का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला इस्लामाबाद में हुई महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ताओं के विफल होने के बाद लिया गया है, जिसने दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
इस्लामाबाद वार्ता में क्यों नहीं बनी बात?
सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर उच्च स्तरीय बातचीत चल रही थी। अमेरिका की कुछ सख्त शर्तों पर सहमति न बन पाने के कारण वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। ट्रंप प्रशासन ने इसे अपनी सुरक्षा नीतियों के खिलाफ माना और तत्काल प्रभाव से सैन्य कार्रवाई का रुख अपना लिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य ही क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल निर्यात का करीब 20-30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग की घेराबंदी का मतलब है दुनिया भर में तेल की सप्लाई का ठप होना और वैश्विक शेयर बाजारों का धराशायी होना। ट्रंप का यह आदेश सीधे तौर पर विरोधी देशों की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश माना जा रहा है।
पेंटागन और नौसेना अलर्ट मोड पर
राष्ट्रपति के आदेश के बाद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) को सक्रिय कर दिया गया है। खाड़ी क्षेत्र में युद्धपोतों और निगरानी विमानों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके हितों और शर्तों के साथ समझौता किया गया, तो अंजाम और भी गंभीर होंगे।
दुनिया पर क्या होगा असर?
इस घेराबंदी से सबसे ज्यादा असर भारत, चीन और यूरोपीय देशों पर पड़ सकता है जो खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का विस्फोट होगा।
