यूनानी चिकित्सा: प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम - NewsKranti

यूनानी चिकित्सा: प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम

कानपुर के हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज में वर्ल्ड यूनानी डे के अवसर पर विशाल सेमिनार और औषधि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने यूनानी चिकित्सा को अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभावों का सुरक्षित विकल्प बताया।

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ख़बर एक नज़र में :
  • आयोजक: नुडवा (NUDVA) और एआईयूटीसी (AIUTC)।
  • स्थान: हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज, कानपुर।
  • मुख्य संदेश: यूनानी चिकित्सा 'साइड-इफेक्ट्स' से मुक्त है।
  • विशेष अतिथि: डॉ. जुबैर सरकार (न्यूरो सर्जन) और डॉ. शाहिद।
  • निष्कर्ष: यूनानी को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की आवश्यकता।

कानपुर। ‘विश्व यूनानी दिवस’ के उपलक्ष्य में कानपुर का ऐतिहासिक हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज ज्ञान और चिकित्सा के केंद्र के रूप में उभरा। नुडवा और एआईयूटीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक भव्य सेमिनार और यूनानी औषधि प्रदर्शनी ने शहर के बुद्धिजीवियों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यूनानी चिकित्सा पद्धति की प्रासंगिकता को आधुनिक युग में फिर से स्थापित करना और इसके फायदों से आम जनमानस को रूबरू कराना था।

दिग्गज डॉक्टरों ने साझा किए अनुभव

सेमिनार की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. मोहम्मद शाहिद और डॉ. निरंकार गोयल के संबोधन से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तनवीर अख्तर ने की। इस अवसर पर शहर के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. ज़ुबैर सरकार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जिन्होंने आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक यूनानी पद्धति के बीच एक तुलनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

‘बिना किसी साइड इफेक्ट के संभव है जटिल बीमारियों का इलाज’

मुख्य अतिथि डॉ. मोहम्मद शाहिद ने अपने संबोधन में यूनानी चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:

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  • “यूनानी औषधियां न केवल बीमारी के लक्षणों को ठीक करती हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाती हैं।”
  • “सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन दवाओं का शरीर के अन्य अंगों पर कोई दुष्प्रभाव (Side-effects) नहीं पड़ता, जो इसे लंबे समय तक चलने वाले इलाजों के लिए सर्वश्रेष्ठ बनाता है।”

अंग्रेजी दवाओं के खतरों पर न्यूरो सर्जन की राय

न्यूरो सर्जन डॉ. ज़ुबैर सरकार ने एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में इस्तेमाल होने वाली कई एलोपैथिक या अंग्रेजी दवाएं लीवर और किडनी पर बुरा असर डालती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यूनानी के प्राचीन फार्मूलों को वैज्ञानिक तरीके से लागू किया जाए, तो यह दुनिया की सबसे सुरक्षित चिकित्सा पद्धति साबित होगी।

औषधि प्रदर्शनी: दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्रदर्शन

सेमिनार के साथ ही हलीम कॉलेज के सभागार में एक भव्य औषधि प्रदर्शनी लगाई गई। यहाँ यूनानी चिकित्सा में उपयोग होने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों, अर्क और सफूफ को प्रदर्शित किया गया।

  • जागरूकता: प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्रों और आम लोगों को यह बताना था कि रसोई में मौजूद मसालों से लेकर बगीचों में उगने वाले पौधों तक में इलाज की शक्ति छिपी है।
  • प्रतिक्रिया: प्राचार्य डॉ. तनवीर अख्तर ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां छात्रों में आयुर्वेद और यूनानी के प्रति जिज्ञासा पैदा करती हैं।

आभार और समापन

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मोहम्मद अलीम और डॉ. आफताब आलम ने किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. जीशान अंसारी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में यूनानी मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए और चिकित्सा के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं पर चर्चा की।

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