कानपुर में कुत्तों को ‘उम्रकैद’! इंसानों पर हमला करने वाले खूंखार डॉग्स अब ताउम्र रहेंगे कैद, गोद लेने पर ही मिलेगी रिहाई – NewsKranti

कानपुर में कुत्तों को ‘उम्रकैद’! इंसानों पर हमला करने वाले खूंखार डॉग्स अब ताउम्र रहेंगे कैद, गोद लेने पर ही मिलेगी रिहाई

कानपुर नगर निगम ने हिंसक कुत्तों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा दी है। अब दो बार से ज्यादा काटने वाले कुत्ते एबीसी सेंटर में ताउम्र कैद रहेंगे। माइक्रोचिप से होगी मॉनिटरिंग।

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Highlights
  • सजा का आधार: दो या दो से अधिक बार लोगों को काटने वाले कुत्तों पर कार्रवाई।
  • निगरानी: एबीसी (ABC) सेंटर में ताउम्र रहेंगे कैद।
  • ट्रैकिंग: गोद लिए जाने की स्थिति में माइक्रोचिप के जरिए होगी निगरानी।
  • उद्देश्य: शहर में 'डॉग बाइट' के बढ़ते मामलों और स्ट्रीट डॉग्स के हमलों को रोकना।
  • व्यवस्था: सेंटर में नसबंदी के साथ-साथ बेहतर खान-पान का प्रावधान।

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक अनोखी और बड़ी खबर सामने आई है। अक्सर आपने गंभीर अपराधों में इंसानों को उम्रकैद की सजा होते सुना होगा, लेकिन अब कानपुर में ‘आदमखोर’ हो चुके कुत्तों को भी उम्रकैद जैसी सजा दी जा रही है। शहर में कुत्तों के बढ़ते हमलों और आतंक को देखते हुए नगर निगम ने ऐसे कुत्तों को हमेशा के लिए पिंजरों में रखने का फैसला किया है जिन्होंने दो या उससे अधिक बार लोगों को अपना शिकार बनाया है।

क्या है नया नियम और ‘उम्रकैद’ का प्रावधान?

उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवारा कुत्तों के हमलों पर लगाम लगाने के लिए सख्त नीति अपनाई जा रही है। नियम के मुताबिक:

  • पहली बार काटने पर: कुत्ते को 10 दिनों के लिए ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) सेंटर में ऑब्जर्वेशन पर रखा जाएगा।
  • दूसरी बार या अधिक बार काटने पर: यदि कुत्ता बार-बार हिंसक व्यवहार करता है, तो उसे हमेशा के लिए एबीसी सेंटर में रखा जाएगा। इसे ही स्थानीय स्तर पर कुत्तों की ‘उम्रकैद’ कहा जा रहा है।

कानपुर में कार्रवाई शुरू: 4-5 कुत्ते पहुंचे ‘जेल’

चीफ वेटरनरी ऑफिसर (CFO) डॉ. आर.के. निरंजन ने बताया कि कानपुर में इस अभियान के तहत अब तक 4 से 5 कुत्तों को चिन्हित कर एबीसी सेंटर में ‘उम्रकैद’ के लिए भेज दिया गया है। इनमें आवारा कुत्तों के साथ-साथ कुछ ऐसे पालतू कुत्ते भी शामिल हैं जिनके मालिकों ने उन पर नियंत्रण खो दिया था या जो बेहद हिंसक हो चुके थे।

खान-पान का ख्याल और माइक्रोचिप से निगरानी

डॉ. निरंजन के अनुसार, इन कुत्तों को एबीसी सेंटर में बेहतर खान-पान और चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। हालांकि, इन्हें समाज से दूर रखा जाएगा ताकि सड़कों पर आम नागरिक सुरक्षित रह सकें। इन कुत्तों की रिहाई की केवल एक ही शर्त है—यदि कोई व्यक्ति इन्हें गोद लेने के लिए तैयार होता है, तो इन्हें छोड़ा जा सकता है। गोद लेने के बाद भी इनके शरीर में एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी, जिससे इनकी लोकेशन और व्यवहार की लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

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