कोलकाता:
पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का सीधा आरोप लगाया है।
अशांति और झड़पों का केंद्र बना बंगाल
बुधवार को मीडिया से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि पूरे देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ हर तरफ हिंसा, झड़पें और अराजकता का माहौल है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार के कर्मचारी और पुलिस प्रशासन जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं ताकि SIR की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी न हो सके।
“संविधान का अस्तित्व खतरे में”
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यहाँ लोगों को अपने बुनियादी अधिकारों के लिए भी अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। ऐसा लगता है जैसे राज्य में संविधान का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।” उन्होंने मांग की कि जब तक मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और सही नहीं हो जाती, तब तक चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं होना चाहिए।
हुगली में भारी तनाव, केंद्रीय बलों की मांग
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से हुगली के मोगरा सहित राज्य के कई जिलों में ‘फॉर्म 7’ जमा करने को लेकर भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक टकराव देखने को मिला है। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टीएमसी के लोग उन्हें बीडीओ ऑफिस में फॉर्म जमा करने से रोक रहे हैं। स्थिति को देखते हुए भाजपा ने अब केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में पुनरीक्षण कार्य कराने की मांग तेज कर दी है।
