ट्रंप का कनाडा को बड़ा झटका: ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बाहर किया, मार्क कार्नी के भाषण से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति – NewsKranti

ट्रंप का कनाडा को बड़ा झटका: ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बाहर किया, मार्क कार्नी के भाषण से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति

कूटनीतिक तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने नए वैश्विक शांति मंच 'बोर्ड ऑफ पीस' से बाहर निकाल दिया है। उन्होंने मार्क कार्नी को चेतावनी देते हुए कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से अस्तित्व में है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • मार्क कार्नी के दावोस भाषण के बाद ट्रंप ने लिया सख्त एक्शन।
  • कनाडा को 'बोर्ड ऑफ पीस' से आधिकारिक तौर पर बाहर किया गया।
  • ट्रंप ने कनाडा के अस्तित्व को अमेरिका के योगदान से जोड़ा।
  • 1 अरब डॉलर के चंदे वाली सदस्यता से कनाडा को हाथ धोना पड़ा।
  • पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश इस बोर्ड के सदस्य बन चुके हैं।

वाशिंगटन/दावोस:

अमेरिका और कनाडा के बीच कूटनीतिक दरार और गहरी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भाषण से नाराज होकर कनाडा को अपने महत्वाकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के निमंत्रण को वापस ले लिया है।

क्या है विवाद की वजह?

दावोस में अपने संबोधन के दौरान मार्क कार्नी ने अमेरिकी आर्थिक नीतियों, विशेषकर टैरिफ के उपयोग को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए “हथियार” बताया था। उन्होंने शक्तिशाली देशों (अमेरिका) पर तंज कसते हुए कहा था कि दुनिया अब आर्थिक एकीकरण की जगह “टूट” की ओर बढ़ रही है। कार्नी के इस भाषण को दावोस में काफी सराहना मिली, जिससे ट्रंप बिदक गए।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे तौर पर मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए लिखा, “प्रिय प्रधानमंत्री कार्नी, कृपया यह समझ लें कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ आपके शामिल होने के निमंत्रण को वापस ले रहा है।” ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा— “कनाडा अमेरिका की वजह से जीवित है, अगली बार कुछ भी बोलने से पहले इसे याद रखें।”

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क्या है बोर्ड ऑफ पीस?

यह ट्रंप द्वारा गठित एक अंतरराष्ट्रीय मंच है जिसका उद्देश्य वैश्विक संघर्षों (जैसे गाजा युद्ध) को सुलझाना और शांति स्थापित करना है। इसमें शामिल होने वाले स्थायी सदस्यों को 1 अरब डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देना होता है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश इसमें शामिल होने की सहमति दे चुके हैं।

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