काजा कैलास की पहली भारत यात्रा: दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच मजबूत रणनीतिक सेतु बनाने की तैयारी – NewsKranti

काजा कैलास की पहली भारत यात्रा: दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच मजबूत रणनीतिक सेतु बनाने की तैयारी

काजा कैलास की इस यात्रा का उद्देश्य भारत और ईयू के बीच सुरक्षा, व्यापार और सप्लाई चेन सहयोग को नई ऊंचाई देना है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईयू राजदूतों के साथ चर्चा कर वैश्विक अस्थिरता के बीच इस साझेदारी को अहम बताया।

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ख़बर एक नज़र में :
  • काजा कैलास ईयू एचआरवीपी के रूप में पहली बार भारत आईं।
  • भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को वैश्विक अस्थिरता के बीच और मजबूत किया जाएगा।
  • 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर ईयू के शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि।
  • 27 जनवरी को होगा 16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन।
  • सप्लाई चेन को जोखिम मुक्त बनाने और व्यापार सहयोग पर मुख्य फोकस।

नई दिल्ली, 24 जनवरी:

यूरोपीय संघ (EU) के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कैलास शनिवार को अपने पहले आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उनका हार्दिक स्वागत करते हुए इस दौरे को “सही समय पर उठाया गया कदम” बताया।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

काजा कैलास की यात्रा भारत और ईयू के बीच नियमित उच्च-स्तरीय बातचीत का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगी। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईयू सदस्य देशों के राजदूतों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने मौजूदा वैश्विक उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को “न्यू नॉर्मल” करार दिया। उन्होंने जोर दिया कि मजबूत भारत-ईयू संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम से बचाने (De-risking) में मदद करेंगे।

गणतंत्र दिवस और भारत-ईयू समिट

काजा कैलास की यह यात्रा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के आगामी दौरे की भूमिका तैयार कर रही है। ये दोनों नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके तुरंत बाद 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईयू नेताओं द्वारा की जाएगी।

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सप्लाई चेन और वैश्विक स्थिरता

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव के बीच भारत और ईयू का एक साथ आना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और हरित ऊर्जा (Green Energy) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा करेंगे।

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