कानपुर | 9 फरवरी, 2026 कानपुर का गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र और वहां स्थित CTI नहर का इलाका इन दिनों सरकारी लापरवाही और कागजी दावों की भेंट चढ़ गया है। नहर के पास से गुजरने वाले लोग रुमाल लगाए बिना नहीं निकल सकते और आसपास रहने वाले हजारों परिवारों का जीवन सड़ांध और बीमारियों के बीच कैद होकर रह गया है। सफाई के नाम पर हुए “दिखावे” ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
15 दिन पहले हुई सफाई, पर आफत अब भी बरकरार
सीटीआई नहर और कूड़ा पुल के आसपास की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। करीब पखवाड़े भर पहले ठेके पर सफाई तो हुई, लेकिन कार्यप्रणाली ऐसी रही कि ‘मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की’। नहर से निकाली गई काली कीचड़ और सड़ा हुआ कूड़ा नहर के किनारों और पुल के पास ही ढेर कर दिया गया।
धूप लगने के बाद अब यह कचरा ऐसी भीषण दुर्गंध पैदा कर रहा है कि आसपास के घरों में खिड़कियां खोलना भी नामुमकिन हो गया है। स्थानीय निवासी रामशरण बताते हैं, “इंसान हैं या कीड़े-मकौड़े? सफाई का मतलब कूड़ा हटाना होता है, उसे फैलाना नहीं। ठेकेदार पैसे लेकर चले गए और हमें बीमारियों के बीच छोड़ दिया।”
विधायक का ‘डिजिटल कायाकल्प’ बनाम ‘जमीनी हकीकत’
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब गोविंद नगर विधायक सुरेंद्र मैथानी के कार्यालय से एक भव्य फोटो और प्रेस नोट जारी किया गया। इसमें दावा किया गया कि ₹7 करोड़ की लागत से सीटीआई नहर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है और काम तेजी पर है।
लेकिन, जैसे ही यह फोटो सोशल मीडिया पर आई, जनता ने इसकी तुलना जमीनी हकीकत से शुरू कर दी। विधायक द्वारा जारी फोटो में नहर साफ-सुथरी दिख रही है, जबकि हकीकत में नहर के किनारे लगे कूड़े के ढेर और उड़ती मक्खियां कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं— क्या यह जीर्णोद्धार सिर्फ कैमरा और सोशल मीडिया के लिए है?
बीमारियों का रेड जोन बना इलाका
कूड़े के ढेरों पर पनप रहे मच्छर और बैक्टीरिया अब संक्रामक रोगों का कारण बन रहे हैं। क्षेत्र में मलेरिया और डेंगू के साथ-साथ सांस की तकलीफों के मरीज बढ़ रहे हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह वातावरण जानलेवा साबित हो रहा है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि प्रशासन केवल नंबर बनाने के चक्कर में आंकड़ों का खेल खेल रहा है, जबकि धरातल पर गंदगी और सड़ांध का साम्राज्य है।
जनता की हुंकार: अब होगा आंदोलन
क्षेत्र के आक्रोशित नागरिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर नहर किनारे जमा इस सड़ांध को नहीं हटाया गया, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। लोगों का कहना है कि वे अब झूठे आश्वासनों से ऊब चुके हैं। यदि 7 करोड़ का बजट है, तो वह दिख क्यों नहीं रहा?
