कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर को जाम के झाम से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा तैयार की गई ई-रिक्शा प्रबंधन योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 10 फरवरी से शहर के सात जोन में ई-रिक्शा का संचालन अनिवार्य होना था, लेकिन पुलिस का ‘होमवर्क’ अधूरा रहने के कारण इसे करीब 10 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
इस देरी की मुख्य वजह हजारों की संख्या में मौजूद ई-रिक्शा चालकों का सत्यापन और उन्हें आवंटित किए जाने वाले क्यूआर कोड (QR Code) का समय पर तैयार न होना बताया जा रहा है।
सात जोन, सात रंग: क्या है ट्रैफिक पुलिस की प्लानिंग?
ट्रैफिक पुलिस ने शहर की भौगोलिक स्थिति और जाम के हॉटस्पॉट्स को देखते हुए कानपुर को सात अलग-अलग जोन में विभाजित किया है। योजना के अनुसार:
- प्रत्येक जोन के ई-रिक्शा को एक विशेष रंग का क्यूआर कोड दिया जाएगा।
- ई-रिक्शा चालक केवल अपने आवंटित जोन (अक्सर उनके गृह क्षेत्र के आसपास) में ही सवारी उठा और छोड़ सकेंगे।
- यदि कोई चालक अपने जोन से बाहर पाया जाता है, तो रंगीन कोड के आधार पर ट्रैफिक पुलिस उसे तुरंत पहचान कर कार्रवाई कर सकेगी।
65 हजार ई-रिक्शा और जाम का जंजाल
कानपुर की सड़कों पर वर्तमान में लगभग 65,000 ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। चकेरी, किदवईनगर, गोविंदनगर, काकादेव और फजलगंज जैसे इलाकों में ये ई-रिक्शा जाम की सबसे बड़ी वजह बन गए हैं। चालक कहीं भी बीच सड़क पर वाहन रोक देते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। विशेषकर स्कूलों की छुट्टी के वक्त स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।
बिना फिटनेस और बीमा नहीं मिलेगा क्यूआर कोड
एडीसीपी ट्रैफिक राजेश कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया है कि यह क्यूआर कोड केवल उन्हीं चालकों को दिया जाएगा जिनके दस्तावेज दुरुस्त होंगे। चालकों को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे:
- वैध पंजीकरण (Registration)
- वाहन का बीमा (Insurance)
- ड्राइविंग लाइसेंस (DL)
- फिटनेस सर्टिफिकेट (Fitness)
अधिकारियों का मानना है कि इस सख्ती से न केवल जाम कम होगा, बल्कि शहर में अवैध रूप से चल रहे (बिना पंजीकरण वाले) ई-रिक्शाओं पर भी लगाम कसी जा सकेगी।
