नेशनल हाईवे या मौत का रास्ता? अकबरपुर-माती मार्ग पर हाहाकार - NewsKranti

नेशनल हाईवे या मौत का रास्ता? अकबरपुर-माती मार्ग पर हाहाकार

कानपुर देहात के अकबरपुर-माती नेशनल हाईवे पर रात 3 बजे एक बड़ा हादसा हो गया। गड्ढों से भरी सड़क पर एक कार को बचाने के चक्कर में ओवरलोड डंपर खाई में पलट गया। घटना ने सरकार के गड्ढा मुक्त सड़क के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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ख़बर एक नज़र में :
  • हादसे का समय: रात लगभग 3:00 बजे।
  • स्थान: अकबरपुर-माती नेशनल हाईवे, कानपुर देहात।
  • घटना: कार को बचाने के चक्कर में डंपर खाई में पलटा।
  • लापरवाही: हाईवे पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और रात में लाइट की कमी।
  • सत्यता की मांग: सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान पर जनता का सवाल।

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘गड्ढा मुक्त उत्तर प्रदेश’ योजना की जमीनी हकीकत कानपुर देहात के अकबरपुर-माती नेशनल हाईवे पर तार-तार होती नजर आ रही है। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 3:00 बजे इस मार्ग पर एक और भयानक हादसा हुआ, जिसने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

रात के सन्नाटे में चीख-पुकार: कैसे हुआ हादसा?

मिली जानकारी के अनुसार, झांसी की ओर से आ रहा एक ओवरलोड डंपर मकसूदाबाद की ओर जा रहा था। रात के अंधेरे में हाईवे पर बने जानलेवा गड्ढों से बचते हुए सामने से एक फोर-व्हीलर गाड़ी आ गई। कार को बचाने के प्रयास में डंपर अनियंत्रित हो गया और सीधे सड़क किनारे गहरी खाई में जा गिरा।

गनीमत रही कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से चालक और परिचालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्हें मामूली चोटें आई हैं और जिला अस्पताल में उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि अगर यह टक्कर सीधी होती, तो क्या परिणाम इतने ‘हल्के’ होते?

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मंत्री-विधायकों का वीआईपी मार्ग, फिर भी अनदेखी क्यों?

अकबरपुर-माती मार्ग जिले का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां से प्रतिदिन राज्य मंत्री, विधायक, सांसद और कैबिनेट मंत्रियों का काफिला गुजरता है। माती मुख्यालय होने के कारण तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां इसी जर्जर मार्ग से होकर निकलती हैं।

“जब सरकार के नुमाइंदों को हर रोज इन झटकों का अहसास होता है, तो फिर इन गड्ढों को भरने के लिए बजट कहाँ अटक जाता है? क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है?” — स्थानीय नागरिक

ओवरलोडिंग और भ्रष्टाचार का गठजोड़

हादसे का दूसरा पहलू ओवरलोडिंग है। भाजपा सरकार में जीरो टॉलरेंस की नीति के दावों के बीच, रात के अंधेरे में क्षमता से अधिक भरे डंपर धड़ल्ले से हाईवे पर दौड़ रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण सड़कें समय से पहले टूट रही हैं और भ्रष्टाचार के चलते उन पर मरम्मत का काम केवल कागजों तक सीमित है।

सरकार से सीधे सवाल: कब जागेगा प्रशासन?

उत्तर प्रदेश सरकार बार-बार गड्ढा मुक्त सड़कों का संकल्प दोहराती है, लेकिन कानपुर देहात की ये तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। क्या स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग इन जानलेवा रास्तों पर अपनी ‘कृपा दृष्टि’ दिखाएंगे? क्या लुप्त होते जा रहे क्षेत्रीय नेता इन ओवरलोड वाहनों और बदहाल सड़कों पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे?

आम जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित सफर की गारंटी चाहती है।

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