कानपुर। अपनी लंबित मांगों को लेकर देशभर के आयकर कर्मियों में उपजा असंतोष अब सड़कों पर उतर आया है। केंद्रीय संयुक्त संघर्ष समिति (JCA), नई दिल्ली के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर गुरुवार को कानपुर के सिविल लाइंस स्थित आयकर भवन में कर्मचारियों और अधिकारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आयकर राजपत्रित अधिकारी संघ और आयकर कर्मचारी महासंघ (पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सर्किल) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धरने ने विभाग के कामकाज को कुछ समय के लिए प्रभावित किया।
प्रातःकाल से ही सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी और राजपत्रित अधिकारी कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट संदेश था कि यदि विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारियों की अनदेखी की गई, तो आगामी समय में यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप ले सकता है।
20 सूत्रीय चार्टर ऑफ डिमांड्स: कैडर रिव्यू से लेकर पेंशन तक
धरने को संबोधित करते हुए आयकर राजपत्रित अधिकारी संघ के महासचिव कामरेड राघवेन्द्र सिंह और आयकर कर्मचारी महासंघ के महासचिव कामरेड सुनील कुमार ने केंद्र सरकार और बोर्ड (CBDT) के रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने 20 प्रमुख मांगों को विस्तार से साझा किया, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- कैडर रिव्यू एवं रीस्ट्रक्चरिंग: विभाग में लंबे समय से लंबित कैडर पुनर्गठन को तुरंत लागू किया जाए ताकि पदोन्नति के रुके हुए रास्ते खुल सकें।
- 8वां वेतन आयोग: आठवें वेतन आयोग के गठन के साथ ही इसके ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ में कर्मचारी संघों के सुझावों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
- पुरानी पेंशन (OPS) की बहाली: कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग NPS को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना को वापस लाना है।
- महंगाई भत्ता (DA) समावेशन: 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाले 50% महंगाई भत्ते को मूल वेतन (Basic Pay) में समाहित किया जाए।
- बकाया एरियर का भुगतान: कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 माह के DA बकाया का तत्काल भुगतान हो।
- नियमितीकरण: विभाग में वर्षों से सेवा दे रहे कैजुअल लेबर को नियमित (Permanent) किया जाए।
वरिष्ठ नेताओं का हुंकार: “हक छीन कर लेंगे”
इस विशाल प्रदर्शन की अध्यक्षता आयकर राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष श्री एस.के. वर्मा ने की। विरोध सभा में वरिष्ठ केंद्रीय नेता शरद प्रकाश अग्रवाल और शांति भूषण मिश्रा ने कहा कि विभाग में वर्कलोड लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मैनपावर की भारी कमी है। कैडर रिव्यू न होने से अधिकारी एक ही पद पर वर्षों तक काम करने को मजबूर हैं।
प्रदर्शन में शिवेन्दु श्रीवास्तव, पंकज यादव, अमित आनंद पाण्डेय और नवनीत शुक्ला जैसे दिग्गज नेताओं ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नॉन-IRS कैरियर प्रोग्रेशन कमेटी की रिपोर्ट में JCA के महत्वपूर्ण सुझावों को दरकिनार किया गया है, जो विभाग के निचले और मध्य स्तर के कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
आगे की रणनीति: तेज होगा आंदोलन
संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यह धरना केवल एक सांकेतिक विरोध है। यदि विभाग के शीर्ष अधिकारियों और वित्त मंत्रालय ने उनकी 20 सूत्रीय मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो आगामी दिनों में दिल्ली मुख्यालय का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान सिविल लाइंस क्षेत्र में भारी पुलिस बल भी तैनात रहा, लेकिन आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासन में संपन्न हुआ।
