कानपुर। शहर के प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्र सिद्धनाथ मंदिर परिसर में शनिवार शाम उस समय तनाव फैल गया, जब जाजमऊ थाने के प्रभारी (इंस्पेक्टर) जितेन्द्र सिंह पर मंदिर के सेवदारों और स्थानीय दुकानदारों ने गंभीर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। चश्मदीदों के अनुसार, मंदिर में दर्शन-पूजन के समय इंस्पेक्टर मंदिर परिसर पहुंचे और वहां फूल-प्रसाद बेच रहे छोटे व्यापारियों और सेवा में जुटे सेवदारों के साथ कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग किया।
आरोप है कि इंस्पेक्टर ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि दुकानदारों को वहां से हटने की धमकी देते हुए दुकान न लगाने की हिदायत दी। इस व्यवहार से मंदिर की मर्यादा को ठेस पहुंचने की बात कहते हुए भक्त और व्यापारी दोनों ही आक्रोशित हो उठे।
व्यापारियों का आक्रोश: “सम्मान नहीं तो दुकान नहीं”
हादसे के बाद मंदिर के बाहर सन्नाटा पसर गया है। फूल विक्रेताओं और सेवदारों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया नया नहीं है।
- पुरानी रंजिश का आरोप: दुकानदारों का कहना है कि पूर्व में भी इंस्पेक्टर द्वारा इसी प्रकार का व्यवहार किया गया है। वे लोग सालों से मंदिर के बाहर फूल-प्रसाद बेचकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन पुलिस उन्हें अपराधी की तरह प्रताड़ित कर रही है।
- बहिष्कार का ऐलान: रोष प्रकट करते हुए व्यापारियों ने सामूहिक निर्णय लिया है कि वे मंदिर के बाहर अपनी दुकानें बंद रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते और दोषी इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने का मुद्दा
मंदिर के सेवदारों ने कहा कि सिद्धनाथ मंदिर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है। मंदिर परिसर के भीतर पुलिस अधिकारी द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करना धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसा है। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों की काउंसलिंग की जाए या उन्हें तत्काल प्रभाव से वहां से हटाया जाए ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
पुलिस का पक्ष और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मामले में जाजमऊ पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी प्रतीक्षित है। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इंस्पेक्टर मौके पर गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों को सुनकर मामले को शांत कराने का प्रयास किया जा रहा है। कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है।
