इबादत का महीना: तरावीह और कुरआन की पवित्रता पर जोर - NewsKranti

इबादत का महीना: तरावीह और कुरआन की पवित्रता पर जोर

कानपुर में रमजान-उल-मुबारक के मद्देनजर 'कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी' ने गाइडलाइंस जारी की हैं। 'अल-शरिया हेल्पलाइन' के जरिए रोजा, जकात और नमाज से जुड़े सवालों के जवाब दिए जाएंगे। उलेमाओं ने तरावीह में पूरा कुरआन सुनने और तजवीद (शुद्धता) के साथ पढ़ने पर जोर दिया है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • हेल्पलाइन: धार्मिक मसलों के हल के लिए 'अल-शरिया हेल्पलाइन' शुरू।
  • तरावीह नियम: पूरे 30 दिन 20 रकअत तरावीह पढ़ना सुन्नत है।
  • सामाजिक अपील: गरीबों की मदद (जकात व फित्रा) को प्राथमिकता दें।
  • अनुशासन: हाफिजों को शुद्ध उच्चारण और सुन्नत हुलिए का पालन करने की सलाह।

कानपुर। बरकतों और रहमतों के पवित्र महीने रमजान के आगमन को लेकर शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं। कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी के अध्यक्ष मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी और शहर के प्रमुख मुफ्तियों ने संयुक्त बयान जारी कर समुदाय से इस माह की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

मुफ्तियों ने स्पष्ट किया कि रमजान की रूह इसकी इबादतों में रमी है। उन्होंने कहा कि पूरे महीने 20 रकअत तरावीह का एहतमाम करना और उसमें पूरा कुरआन मुकम्मल सुनना ‘सुन्नत-ए-मुतवातिरा’ है। उन्होंने उन लोगों को नसीहत दी जो केवल 3 या 6 दिनों में ‘शबीना’ (जल्दबाजी में कुरआन खत्म करना) पढ़कर तरावीह छोड़ देते हैं। उलेमाओं के अनुसार, यह सुन्नत के खिलाफ है और पूरे माह नमाज का एहतमाम जरूरी है।

हाफिजों के लिए विशेष हिदायत: “ठहर-ठहर कर पढ़ें कलाम-ए-इलाही”

अकादमी ने तरावीह पढ़ाने वाले हाफिजों के लिए सख्त लेकिन जरूरी मशवरे जारी किए हैं:

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  • शुद्ध उच्चारण (तजवीद): कुरआन को बहुत तेजी से पढ़ना उचित नहीं है। हाफिजों से अपील की गई है कि वे सही मखारिज और ठहर-ठहर कर (तजवीद के साथ) पढ़ें ताकि सुनने वाले नमाजियों को शब्द समझ आ सकें।
  • सुन्नत लिबास: उलेमाओं ने हाफिजों को ‘शरियाई लिबास’ (कुर्ता-पायजामा/टोपी) पहनने और दाढ़ी की सुन्नत पर अमल करने की नसीहत दी है, ताकि इबादत का माहौल गरिमापूर्ण बना रहे।

‘अल-शरिया हेल्पलाइन’: घर बैठे पाएं मसलों का हल

रमजान के दौरान रोजा टूटने, जकात की गणना, फित्रा की राशि और अन्य शरियाई मसलों को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल होते हैं। इसके समाधान के लिए अकादमी ने ‘अल-शरिया हेल्पलाइन’ जारी की है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से शहर के प्रतिष्ठित मुफ्ती और आलिम फोन पर ही लोगों की शंकाओं का समाधान करेंगे, ताकि किसी की इबादत में कोई कमी न रहे।

जकात और समाज सेवा: गरीबों का रखें खास ख्याल

मुफ्ती इकबाल कासमी ने कहा कि रमजान केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि यह इंसानियत और हमदर्दी का महीना है।

  1. वक्त पर जकात: अपनी संपत्ति का ढाई प्रतिशत (2.5%) हिस्सा गरीबों, अनाथों और विधवाओं को समय पर दें ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
  2. सादगी और एहतराम: गैर-मुस्लिम भाइयों के सामने खुलेआम खाने-पीने से बचें और रमजान के एहतराम में शहर के माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखें।
  3. एतिकाफ और शब-ए-कद्र: रमजान के आखिरी अशरे (अंतिम 10 दिन) में एतिकाफ में बैठने और शब-ए-कद्र की तलाश करने की अहमियत पर जोर दिया गया।
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