प्रयागराज/मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में आज का दिन कानूनी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार (20 फरवरी) को दोपहर 2 बजे से इस मामले की सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस अवनीश सक्सेना की एकल पीठ के सामने चले इस कानूनी संग्राम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपना बहुप्रतीक्षित जवाब अदालत में पेश किया।
एएसआई के जवाब पर टिकी सबकी नजरें
पिछली सुनवाई (30 जनवरी) के दौरान एएसआई ने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था। आज एएसआई की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे के बाद अब इस बात की संभावना बढ़ गई है कि विवादित परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Scientific Survey) की दिशा में कोर्ट कोई बड़ा आदेश दे सकता है। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह का निर्माण प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर किया गया है और वहां आज भी सनातन धर्म के प्रतीक चिह्न मौजूद हैं।
18 याचिकाओं पर एक साथ ‘प्रहार’
हाईकोर्ट इस समय हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल कुल 18 मूल वादों पर एक साथ सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से शाही ईदगाह मस्जिद को अवैध अतिक्रमण बताते हुए उसे हटाने और पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की गई है। वहीं, मुस्लिम पक्ष (शाही ईदगाह कमेटी) ने ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ का हवाला देते हुए इन याचिकाओं की पोषणीयता पर सवाल उठाए हैं, जिसे हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आगे की राह
अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की तर्ज पर इस मामले की सीधे सुनवाई कर रही है ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी न हो। आज की सुनवाई में वकीलों ने ‘प्रतिनिधि वाद’ और साक्ष्यों के संकलन पर भी अपनी दलीलें रखीं। कोर्ट ने रिकॉर्ड की विशालता को देखते हुए सभी पक्षों को अपने-अपने ऑब्जेक्शन समय पर दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मथुरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हाईकोर्ट में सुनवाई के मद्देनजर मथुरा के कटरा केशवदेव इलाके और शाही ईदगाह के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। धार्मिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के कारण इस केस की हर पल की अपडेट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
