कानपुर। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती डिजिटल तकनीक और शोध की शुचिता को बनाए रखने के उद्देश्य से, कानपुर के ऐतिहासिक विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म (VSSD) महाविद्यालय में एक महत्वपूर्ण स्टाफ ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। 20 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों और कर्मचारियों को आधुनिक शोध की बारीकियों और डिजिटल पहचान (DOI) के तकनीकी पहलुओं से रूबरू कराया गया।
संयुक्त तत्वावधान में हुआ भव्य आयोजन
यह कार्यशाला महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC), रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल तथा इंसटीट्यूशनल इनोवेशन सेल (IIC) के संयुक्त प्रयासों का परिणाम थी। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘डिजिटल अवेयरनेस: प्लेज़रिज़्म चेक एवं डिजिटल ऑब्जेक्ट आइडेंटिफ़ायर (DOI)’ रखा गया था। वर्तमान युग में जहाँ सूचनाओं की भरमार है, वहां शोध की मौलिकता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसे इस सत्र में विस्तार से समझाया गया।
प्राचार्या प्रो. नीरु टंडन का संबोधन: “डिजिटल साक्षरता ही भविष्य”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर नीरु टंडन ने अपने उद्बोधन में शोध की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “उच्च शिक्षा के बदलते परिवेश में केवल शोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शोध की मौलिकता (Originality) और डिजिटल साक्षरता अनिवार्य है। यदि हम वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, तो हमें अकादमिक ईमानदारी के कड़े मानकों का पालन करना होगा।”
प्लेज़रिज़्म और DOI: शोधकर्ताओं के लिए संजीवनी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने प्लेज़रिज़्म (साहित्यिक चोरी) से बचने के व्यवहारिक तरीके साझा किए। शिक्षकों को बताया गया कि कैसे Turnitin और Urkund जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग कर शोध लेखों की शुद्धता जाँची जा सकती है।
वहीं, DOI (Digital Object Identifier) पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह किसी भी शोध पत्र या ई-कंटेंट का स्थायी डिजिटल लिंक होता है। जिस तरह एक व्यक्ति के लिए ‘आधार कार्ड’ जरूरी है, उसी तरह एक मानक शोध पत्र के लिए DOI उसकी वैश्विक पहचान सुनिश्चित करता है।
इन दिग्गजों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम के सफल संचालन में IQAC समन्वयक प्रो. प्रमोद डोबाल, रिसर्च सेल के सह-संयोजक प्रो. आनंद शुक्ला, और IIC संयोजक श्री रंजीत कुमार की अहम भूमिका रही। कार्यक्रम का बेहतरीन समन्वय डॉ. अनुराधा तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. नंदलाल, प्रो. आशीष कुमार सिंह, प्रो. ज्ञान प्रकाश, डॉ. नीलम पाल, और श्रीमती बृजेश नैनवी सहित कॉलेज के समस्त शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रमुख सुझाव: शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के अचूक मंत्र
कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों ने शोधकर्ताओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण ‘गोल्डन रूल्स’ साझा किए:
- मौलिकता का मानक: शोध कार्य में प्लेज़रिज़्म (साहित्यिक चोरी) को हमेशा 10% से कम रखने का लक्ष्य रखें।
- सही संदर्भ (Citation): किसी भी विचार या डेटा का उपयोग करते समय हमेशा प्रामाणिक स्रोतों का हवाला दें।
- DOI का अनिवार्य प्रयोग: वैश्विक दृश्यता के लिए अपने पेपर को DOI के साथ ही प्रकाशित करें।
- डिजिटल प्रोफाइलिंग: Google Scholar और ORCID ID जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रोफाइल अपडेट रखें।
- सॉफ्टवेयर का उपयोग: शोध जमा करने से पहले उसे एंटी-प्लेज़रिज़्म सॉफ्टवेयर से जरूर गुजारें।
