कानपुर। 300 करोड़ की वक्फ संपत्ति कब्जाने के मामले में आरोपी अखिलेश दुबे की बेटी सौम्या दुबे की अग्रिम जमानत याचिका जिला जज की कोर्ट ने खारिज कर दी है। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि पूरे प्रकरण में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वह सिर्फ पंच के रूप में शामिल है। अभियोजन की ओर से मामले का विरोध किया गया। बता दें कि नवाब इब्राहिम हाता परेड निवासी 80 वर्षीय मुतवल्ली मोइनुद्दीन ने बताया कि सिविल लाइंस स्थित संपत्ति 13/387, 13/388 व 13/390 वक्फ सम्पत्ति शेख फखरूददीन हैदर वक्फ नम्बर 70 कानपुर नगर की संपत्ति है। जो कि एसएम बशीर के पिता हाफिज हलीम साहब को सन् 1911 में 99 वर्ष के पट्टे पर दी गई थी।
इसके बाद अखिलेश दुबे और उसके गैंग ने फर्जीवाड़ा करके करीब तीन बीजा जमीन 70 हजार वर्ग फिट, की इस जमीन को अवैध रूप से दस्तावेजों में जेल में बंद डब्ल्यू वन साकेत नगर निवासी अधिवक्ता अखिलेश दुबे, उनके भाई सर्वेश दुबे, बेटी सौम्या दुबे, राजकुमार शुक्ला, जय प्रकाश दुबे, शिवांश सिंह उर्फ पप्पू के साथ ही वक्फ संपत्ति पर कब्जा करने में मदद करने वाले इंस्पेक्टर सभाजीत के खिलाफ ग्वालटोली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी।
डीजीसी दिलीप अवस्थी ने बताया कि जेल में बंद अखिलेश की बेटी सौम्या दुबे ने जिला जज अनमोल पाल की कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। जिसमें सौम्या की ओर से तर्क दिया गया कि उनका जमीन के लीज से कोई लेना देना नहीं है। वह लीज में सिर्फ पंच के रूप में शामिल है। वहीं अखिलेश दुबे और उनके परिवारों की कुल 75 एकाउंट पुलिस को मिले हैं। जिनमें से पुलिस के पास 33 एकाउंट ऐसे हैं। जिनमें पैसों का आदान-प्रदान किया गया है। डीजीसी ने बताया कि जो हेड ऑफ फैमिली अकाउंट था। उससे उनके बेटे अखिल दुबे के खाते में पैसा ट्रांसफर किया गया। अखिल दुबे के खाते से पैसा सौम्या के खाते में गया है। सौम्या दुबे पिता की बेनीफीशरी होने के साथ पंच भी बनाया गया।
