कानपुर: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कड़े रुख के बीच कानपुर जिला प्रशासन ने भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ एक और बड़ी स्ट्राइक की है। कानपुर के सबसे महंगे इलाकों में शुमार सिविल लाइंस, कोपरगंज और चुन्नीगंज क्षेत्रों में फैली ब्रिटिश इंडिया कॉर्पोरेशन (BIC) की 11.26 हेक्टेयर बहुमूल्य नजूल भूमि को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। इस कार्रवाई से शहर के रसूखदारों और जमीन से जुड़े सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन की टीम ने मौके पर गाड़े बोर्ड
जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह के आदेश के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर अनुभव सिंह के साथ तहसीलदार सदर विनय द्विवेदी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की भारी-भरकम टीम मौके पर पहुंची। टीम ने ब्लॉक संख्या 9, 11, 13 और 82-85 में स्थित इन 11 भूखंडों पर पहुंचकर सरकारी संपत्ति होने का बोर्ड लगा दिया। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इन जमीनों पर किसी भी प्रकार का निजी हस्तक्षेप अवैध माना जाएगा।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि इन संपत्तियों की पट्टा (Lease) अवधि काफी समय पहले ही समाप्त हो चुकी थी। जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार, इन जमीनों पर पुनर्प्रवेश (Re-entry) के पीछे कई तकनीकी और कानूनी कारण थे:
- लीज का नवीनीकरण न होना: पट्टा अवधि खत्म होने के बाद नवीनीकरण के लिए कोई वैध आवेदन नहीं दिया गया था।
- लीज रेंट का भुगतान नहीं: लंबे समय से इन बेशकीमती जमीनों का लीज रेंट सरकारी खजाने में जमा नहीं किया गया था।
- शर्तों का उल्लंघन: आवासीय या मिल उपयोग के लिए दी गई जमीन पर अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
- नजूल नियमावली: नजूल मैनुअल के प्रावधानों के तहत एक निश्चित अवधि के बाद शाश्वत पट्टा प्रतिबंधित है।
सरकारी परियोजनाओं में होगा इस्तेमाल
कब्जे में ली गई यह जमीन कानपुर के ‘हार्ट ऑफ द सिटी’ में स्थित है, जिसकी बाजार दर अरबों रुपये आंकी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि अब इन भूखंडों का प्रबंधन पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में रहेगा। इन जमीनों का उपयोग भविष्य में शहर के विकास, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट या अन्य महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए किया जाएगा।
कानूनी घेरे में थी BIC की संपत्तियां
बता दें कि ब्रिटिश इंडिया कॉर्पोरेशन (BIC) की मिल संपत्तियों का वैधानिक परीक्षण काफी समय से चल रहा था। शासन के 16 जनवरी 2026 के निर्देशों के बाद, प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए इन जमीनों को अनावंटित सरकारी भूमि के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
