कानपुर:गलन भरी ठंड और घने कोहरे के मौसम में अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ने के बीच GSVM मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग ने केटामाइन थैरेपी के जरिए बड़ी सफलता हासिल की है। कॉलेज की केटामाइन क्लीनिक में अब तक 30 अवसादग्रस्त मरीजों में एक ही खुराक से आत्महत्या के विचार खत्म करने में सफलता मिली है।
मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. धनंजय चौधरी के अनुसार, सर्दी और कोहरे में धूप की कमी से मस्तिष्क में न्यूरोकेमिकल असंतुलन हो जाता है। इससे अवसाद गहराता है और आत्महत्या का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में केटामाइन थैरेपी बेहद प्रभावी साबित हो रही है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि थैरेपी के तहत मरीजों को 0.5 मिलीग्राम केटामाइन की नियंत्रित खुराक दी जाती है। इसका असर तुरंत दिखाई देता है और मरीज के मन से आत्महत्या का विचार समाप्त हो जाता है। यह थैरेपी अमेरिका समेत कई विकसित देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है।
उन्होंने बताया कि धुंध और कोहरे के कारण मेलाटोनिन और सेरोटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, जिससे सर्कैडियन रिदम प्रभावित होता है और नींद-जागने का चक्र गड़बड़ा जाता है। इससे मानसिक स्थिति और खराब हो सकती है।
विभाग में अवसाद के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में दवाओं की खुराक भी समायोजित की जा रही है। जिन मरीजों में आत्महत्या की प्रवृत्ति की पुष्टि होती है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर केटामाइन थैरेपी दी जाती है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार देखा जा रहा है।
