कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में ‘खेला होबे’ के जवाब में अब ‘परिवर्तन होबे’ का नारा गूंजने लगा है। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने स्पष्ट कर दिया है कि 2026 का विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए आखिरी साबित होने वाला है। घोष ने दावा किया है कि राज्य की जनता अब ममता बनर्जी के शासन से तंग आ चुकी है और इस बार का बदलाव ऐतिहासिक होगा।
“जनता का मूड बदल चुका है”
दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में अब डर का माहौल खत्म हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने सालों तक पुलिस और गुंडों के दम पर राज किया है, लेकिन अब आम आदमी सड़कों पर उतरने को तैयार है। घोष के अनुसार, “राज्य में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि अब जनता के पास भाजपा को चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”
अमित शाह के ‘प्लान-2026’ में घोष की भूमिका
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे के बाद बंगाल भाजपा में नई जान आई है। सूत्रों के मुताबिक, शाह ने दिलीप घोष, सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार को एक साथ मिलकर ‘मिशन-2026’ पर काम करने का निर्देश दिया है। दिलीप घोष को संगठन के पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। घोष का कहना है कि “पुराने और नए कार्यकर्ताओं का संगम ही टीएमसी के किले को ढहाएगा।”
घुसपैठ और तुष्टीकरण पर कड़ा प्रहार
दिलीप घोष ने हमेशा की तरह घुसपैठ के मुद्दे पर ममता सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि “बंगाल को घुसपैठियों का अड्डा बना दिया गया है। तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राज्य की पहचान खतरे में है। हम एक-एक घुसपैठिये की पहचान करेंगे और बंगाल को फिर से ‘सोनार बांग्ला’ बनाएंगे।”
TMC की प्रतिक्रिया और पलटवार
वहीं, दिलीप घोष के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि दिलीप घोष अपनी ही पार्टी में दरकिनार कर दिए गए हैं और सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह के दावे कर रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोष की जमीनी पकड़ को भाजपा नजरअंदाज नहीं कर सकती, और उनका सक्रिय होना आगामी चुनाव में ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है।
