बलूचिस्तान में खूनी संघर्ष तेज: मानवाधिकार संगठनों ने लगाए ‘एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग्स’ के आरोप, हालात बेकाबू – NewsKranti

बलूचिस्तान में खूनी संघर्ष तेज: मानवाधिकार संगठनों ने लगाए ‘एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग्स’ के आरोप, हालात बेकाबू

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अशांति चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने रिपोर्ट दी है कि वहां न्यायेतर हत्याओं और लोगों के लापता होने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे स्थानीय आबादी में भारी आक्रोश है।

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Highlights
  • बलूचिस्तान में हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं में भारी वृद्धि।
  • मानवाधिकार संगठनों ने 'एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग्स' और जबरन गायब करने के गंभीर आरोप लगाए।
  • पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलूच अलगाववादियों के बीच संघर्ष तेज।
  • स्थानीय लोगों में सेना की कार्रवाई को लेकर भारी गुस्सा और प्रदर्शन।

क्वेटा/इस्लामाबाद:

बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, प्रांत में हिंसा की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वहां ‘न्यायेतर हत्याओं’ का सिलसिला तेज हो गया है।

लापता लोगों और हत्याओं का बढ़ता ग्राफ

मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के दिनों में कई बलूच नागरिकों को सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिया गया और बाद में उनके शव बरामद हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन हत्याओं के पीछे कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। बलूच प्रदर्शनकारी और ‘वॉइस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स’ जैसे संगठन लंबे समय से इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा रहे हैं।

स्थानीय विरोध और सुरक्षा बलों की कार्रवाई

प्रांत में सशस्त्र समूहों और पाकिस्तानी सेना के बीच झड़पें आम हो गई हैं। जहां एक ओर उग्रवादी संगठन सरकारी संपत्तियों और सुरक्षा चौकियों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों का आरोप है कि उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। क्वेटा और अन्य प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

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वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

बलूचिस्तान में मानवीय संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही राजनीतिक संवाद और मानवाधिकारों की बहाली नहीं हुई, तो यह क्षेत्र और भी गहरे संकट में डूब सकता है।

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