कानपुर | औद्योगिक नगरी कानपुर का जाजमऊ इलाका एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई व्यापार नहीं बल्कि एक भयानक स्वास्थ्य त्रासदी है। हाल ही में हुए एक स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों ने रोंगटे खड़े कर दिए हैं। जाजमऊ के 233 निवासियों के खून की जांच की गई, जिसमें से 215 लोगों के रक्त में क्रोमियम (Chromium) पाया गया है। यानी जांचे गए लगभग 92 प्रतिशत लोग इस भारी धातु के जहर की चपेट में हैं।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी चेतावनी के बावजूद स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी अनहोनी या गंभीर लक्षणों के उभरने का इंतजार कर रहा है।
क्या है रिपोर्ट का कड़वा सच?
जाजमऊ क्षेत्र, जो अपनी टेनरियों (चमड़ा उद्योग) के लिए दुनिया भर में मशहूर है, वहां के भूजल और हवा में क्रोमियम की मौजूदगी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ताजा जांच रिपोर्ट के अनुसार:
- कुल नमूने: 233
- क्रोमियम पॉजिटिव: 215
- प्रभावित दर: 92.2%
क्रोमियम एक ऐसी धातु है जो शरीर में जमा होने पर किडनी, लिवर और फेफड़ों को बुरी तरह डैमेज कर सकती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से त्वचा रोग, सांस की तकलीफ और सबसे खतरनाक— कैंसर होने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग की ‘प्रतीक्षा’ पर सवाल
रिपोर्ट में इतनी भारी संख्या में लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का रवैया सुस्त बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, विभाग का तर्क है कि जब तक लोगों में शारीरिक रूप से गंभीर ‘सिम्पटम्स’ (लक्षण) दिखाई नहीं देते, तब तक बड़े पैमाने पर इलाज या इमरजेंसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
जानकारों का कहना है कि क्रोमियम एक ‘साइलेंट किलर’ है। यह धीरे-धीरे अंगों को खोखला करता है। जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।
जाजमऊ: प्रदूषण की पुरानी मार
जाजमऊ में क्रोमियम प्रदूषण नया नहीं है। वर्षों से टेनरियों से निकलने वाला अनुपचारित (Untreated) कचरा गंगा और भूजल में मिल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां का पानी पीने लायक तो दूर, नहाने लायक भी नहीं बचा है। बावजूद इसके, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति और प्रदूषण नियंत्रण के वादे कागजों तक सीमित हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
चिकित्सकों के अनुसार, खून में क्रोमियम मिलना इस बात का सबूत है कि यह तत्व हमारे फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) में प्रवेश कर चुका है।
“अगर जल्द ही इन लोगों का डिटॉक्सिफिकेशन शुरू नहीं किया गया और प्रदूषित पानी के स्रोत बंद नहीं किए गए, तो जाजमऊ में भविष्य में ‘कैंसर बेल्ट’ बनने का खतरा है।”
