इंटर-कास्ट मैरिज की राह में आई दरार, मुकदमे की जगह पुलिस ने दी सुलह की सौगात - NewsKranti

इंटर-कास्ट मैरिज की राह में आई दरार, मुकदमे की जगह पुलिस ने दी सुलह की सौगात

कानपुर नगर के काकादेव थाने में प्रभारी निरीक्षक राजेश शर्मा के निर्देशन में परिवार परामर्श केंद्र ने बड़ी सफलता हासिल की। मारपीट और आपसी कलह के बाद मुकदमा दर्ज कराने आई प्रियंका चौधरी और उनके पति समीर गुप्ता को समझा-बुझाकर दोबारा साथ रहने के लिए राजी किया गया।

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ख़बर एक नज़र में :
  • विवाद: आपसी मारपीट और ससुराल में न रहने देने को लेकर पत्नी पहुंची थी थाने।
  • शादी: वर्ष 2021 में हुई थी इंटर-कास्ट मैरिज।
  • टीम: राजेश कुमार शर्मा (प्रभारी निरीक्षक), शिवकरण वर्मा (वरिष्ठ उपनिरीक्षक), अनीता सिंह और दीक्षा (म0उ0नि0)।
  • परिणाम: मुकदमा दर्ज होने की जगह दोनों पक्षों में सुलह, एक साथ विदा हुए पति-पत्नी।

कानपुर नगर, 26 फरवरी 2026: कहते हैं कि जोड़ियां आसमान में बनती हैं, लेकिन उन्हें धरती पर सहेजने की जिम्मेदारी कभी-कभी समाज और प्रशासन को भी उठानी पड़ती है। कुछ ऐसा ही मामला कानपुर नगर के थाना काकादेव में देखने को मिला, जहां पुलिस की सूझबूझ और मानवीय दृष्टिकोण ने दो परिवारों को अदालत के चक्कर काटने और बर्बाद होने से बचा लिया।

क्या था पूरा मामला?

काकादेव थाना क्षेत्र के अंतर्गत परम हंस स्कूल के सामने रहने वाली प्रियंका चौधरी पत्नी समीर गुप्ता (उर्फ अमित गुप्ता) बुधवार को बेहद गुस्से और हताशा में थाने पहुंचीं। प्रियंका का आरोप था कि उनके पति समीर आए दिन पारिवारिक विवाद के चलते उनके साथ मारपीट करते हैं। विवाद इतना गहरा चुका था कि प्रियंका अब अपने ससुराल में रहने को तैयार नहीं थीं और वह अपने पति व सास के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की जिद पर अड़ी थीं।

इंटर-कास्ट मैरिज और सामाजिक चुनौतियां

प्रियंका और समीर की शादी साल 2021 में हुई थी। चूंकि यह एक इंटर-कास्ट (अंतर्जातीय) विवाह था, इसलिए शुरुआती दिनों से ही कुछ वैचारिक मतभेद और सामाजिक दबाव की स्थितियां बनी हुई थीं। शादी के अल्प समय के भीतर ही विवाद इस कदर बढ़ गया कि मामला थाने की दहलीज तक आ गया।

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काकादेव पुलिस की ‘मिशन रिकवरी’

प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझा। उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए परिवार परामर्श केंद्र की टीम को सक्रिय किया। वरिष्ठ उपनिरीक्षक शिवकरण वर्मा (प्रभारी परिवार परामर्श केंद्र) के साथ उपनिरीक्षक अनीता सिंह और दीक्षा ने दोनों पक्षों को तलब किया।

पुलिस टीम ने घंटों तक दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की। सूत्रों के मुताबिक, इंटर-कास्ट मैरिज होने के कारण कमेटी को इस विवाद को सुलझाने में “कड़ी मशक्कत” करनी पड़ी। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि यदि आज मुकदमा दर्ज होता है, तो आने वाले कई साल कचहरी और पुलिस के चक्कर लगाने में बर्बाद हो जाएंगे, जिसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा।

बर्बाद होने से बचे दो परिवार

पुलिस की ममतामयी और सख्त काउंसिलिंग का असर यह हुआ कि प्रियंका और समीर ने अपनी पुरानी शिकायतों को भुलाने का फैसला किया। प्रियंका, जो कुछ घंटे पहले जेल भेजने की जिद पर थीं, अब मुस्कराते हुए पति के साथ घर जाने को तैयार हो गईं। समीर ने भी अपनी गलतियों को स्वीकार किया और भविष्य में प्रेमपूर्वक रहने का वादा किया।

प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार शर्मा का बयान: “हमारा उद्देश्य केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि समाज को टूटने से बचाना भी है। यदि इस प्रकरण में केस दर्ज होता, तो दोनों पक्ष सालों परेशान रहते। हमें खुशी है कि हमारी टीम ने दो परिवारों को बिखरने से बचा लिया।”

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