कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर का व्यस्ततम रामादेवी चौराहा एक बार फिर खून से लाल हो गया। सोमवार को यहाँ एक भीषण सड़क हादसे में एक युवती, जो पेशे से नर्स थी, की दर्दनाक मौत हो गई। दूसरों का जीवन बचाने वाली इस “एंजेल ऑफ मर्सी” को एक बेकाबू डीसीएम ने मौत की नींद सुला दिया। इस घटना के बाद रामादेवी इलाके में भारी जाम लग गया और लोगों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष देखा गया।
ड्यूटी कर लौट रही थी घर, रास्ते में खड़ा था ‘काल’
जानकारी के अनुसार, मृतका कानपुर के ही एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में नर्स के पद पर तैनात थी। प्रतिदिन की तरह वह अपनी शिफ्ट खत्म कर खुशी-खुशी अपने घर की ओर लौट रही थी। चश्मदीदों ने बताया कि जैसे ही वह रामादेवी चौराहे के पास पहुंची, पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार डीसीएम ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवती उछलकर सड़क पर गिरी और वाहन का पहिया उसके ऊपर से गुजर गया।
चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल
हादसे के तुरंत बाद चौराहे पर मौजूद लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। राहगीरों ने तुरंत एम्बुलेंस को फोन किया और पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मौके पर पहुंची चकेरी थाना पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया और शव को सड़क से हटाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
जैसे ही पुलिस ने मृतका के पास मिले आईडी कार्ड और मोबाइल से उसके परिजनों को सूचना दी, घर में कोहराम मच गया। अस्पताल की यूनिफॉर्म में अपनी बेटी की घर वापसी का इंतजार कर रहे मां-बाप को जब उसकी मौत की खबर मिली, तो वे सुध-बुध खो बैठे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि उनकी मासूम बेटी का क्या कसूर था।
पुलिस की तफ्तीश और यातायात व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद डीसीएम चालक वाहन छोड़कर भागने में सफल रहा, हालांकि पुलिस ने गाड़ी को अपने कब्जे में ले लिया है। चकेरी इंस्पेक्टर ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपी चालक की पहचान की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रामादेवी चौराहे पर भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार अक्सर बड़े हादसों का सबब बनती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है।
