संसद में Asset Tokenization बिल की मांग, भविष्य में मजह कुछ रुपयों में मिलेगी करोड़ों की प्रापर्टी – NewsKranti

संसद में Asset Tokenization बिल की मांग, भविष्य में मजह कुछ रुपयों में मिलेगी करोड़ों की प्रापर्टी

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आज संसद में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने Asset Tokenization पर बोलते हुए 𝗧𝗼𝗸𝗲𝗻𝗶𝘀𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗕𝗶𝗹𝗹 ​की मांग की। अगर संसद में 𝗧𝗼𝗸𝗲𝗻𝗶𝘀𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗕𝗶𝗹𝗹 आता है तो आज जिस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये की जरूरत पड़ती है, वह महज कुछ रुपये में खरीदी जा सकती है।

डिजिटल तकनीक के तेज़ी से बढ़ते दौर में एसेट टोकनाइज़ेशन निवेश और वित्तीय क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर उभर रहा है। यह प्रक्रिया पारंपरिक भौतिक या वित्तीय संपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदलने की है, जिन्हें ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से खरीदा-बेचा जा सकता है।

क्या है एसेट टोकनाइज़ेशन?

एसेट टोकनाइज़ेशन में किसी संपत्ति—जैसे रियल एस्टेट, सोना, शेयर, बॉन्ड, कला कृतियां या यहां तक कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट—को छोटे-छोटे डिजिटल हिस्सों में बांट दिया जाता है। हर टोकन उस संपत्ति में हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। ये टोकन ब्लॉकचेन पर दर्ज होते हैं, जिससे इनका रिकॉर्ड छेड़छाड़-रहित और पारदर्शी रहता है।

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कैसे काम करता है यह सिस्टम?

सबसे पहले संपत्ति का मूल्यांकन किया जाता है। इसके बाद उस संपत्ति के कुल मूल्य के अनुसार डिजिटल टोकन जारी किए जाते हैं। निवेशक अपनी क्षमता के अनुसार इन टोकन को खरीद सकते हैं। ब्लॉकचेन तकनीक के कारण हर लेन-देन सुरक्षित, तेज़ और ट्रैक करने योग्य होता है।

निवेशकों को क्या फायदे?

  • आंशिक निवेश की सुविधा: बड़ी संपत्तियों में भी छोटे निवेश संभव
  • उच्च तरलता: पारंपरिक संपत्तियों की तुलना में टोकन को जल्दी खरीदा-बेचा जा सकता है
  • पारदर्शिता और सुरक्षा: ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड होने से धोखाधड़ी की आशंका कम
  • वैश्विक पहुंच: दुनिया भर के निवेशक एक ही प्लेटफॉर्म पर निवेश कर सकते हैं

भारत और वैश्विक परिदृश्य

दुनिया के कई विकसित देशों में एसेट टोकनाइज़ेशन पर तेज़ी से काम हो रहा है। भारत में भी फिनटेक कंपनियां और स्टार्टअप्स इस दिशा में प्रयोग कर रहे हैं, हालांकि नियामकीय ढांचे को लेकर अभी स्पष्टता विकसित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट, कमोडिटीज़ और बॉन्ड मार्केट में टोकनाइज़ेशन का बड़ा रोल हो सकता है।

चुनौतियां और जोखिम

जहां इसके फायदे आकर्षक हैं, वहीं कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। नियामकीय अनिश्चितता, साइबर सुरक्षा, निवेशकों की जागरूकता की कमी और तकनीकी जटिलताएं इस क्षेत्र के सामने प्रमुख बाधाएं हैं।

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