Kanpur डीएम का एक्शन, बिल्डर को बेची ₹24 करोड़ की नजूल जमीन

भू-माफिया और बिल्डर गठजोड़ पर डीएम का ‘हंटर’: ₹24.77 करोड़ की नजूल जमीन जब्त

कानपुर डीएम ने सिविल लाइंस स्थित 24.77 करोड़ की नजूल जमीन का अवैध सौदा रद्द कर दिया है। पट्टाधारकों ने बिना फ्रीहोल्ड कराए बिल्डर को जमीन बेच दी थी। अब यह भूमि सरकारी खाते में दर्ज होगी।

admin
By
admin
3 Min Read
ख़बर एक नज़र में :
  • फर्जी फ्रीहोल्ड: जमीन सरकारी थी, लेकिन कागजों में प्राइवेट दिखाकर बिल्डर को बेची गई।
  • लीज रेंट डिफॉल्ट: 1982 के बाद से कोई लीज रेंट सरकार को नहीं मिला।
  • प्रशासनिक सतर्कता: एसडीएम सदर और सहायक प्रभारी नजूल की जांच में हुआ खुलासा।
  • रिकवरी: ₹24.77 करोड़ की संपत्ति अब फिर से जनता और सरकार की हुई।

कानपुर नगर | विशेष संवाददाता

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में बेशकीमती जमीनों को खुर्द-बुर्द करने वाले सिंडिकेट पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। पॉश इलाके सिविल लाइंस में नियमों की धज्जियां उड़ाकर एक निजी बिल्डर को बेची गई ₹24.77 करोड़ की नजूल जमीन को जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह ने वापस सरकारी खाते में दर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है।

इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और अवैध प्लॉटिंग करने वाले बिल्डरों में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

- Advertisement -

क्या है पूरा मामला? (The Scam Exposed)

मामला सिविल लाइंस स्थित भूखंड संख्या 14/59ए का है। यह जमीन नजूल (सरकारी) संपत्ति है, जिसे वर्ष 1982 में के.सी. बेरी और उनके परिवार को भवन प्रयोजन के लिए पट्टे (Lease) पर दिया गया था। नजूल मैनुअल के अनुसार, पट्टे की एक निश्चित अवधि होती है और उसका समय-समय पर नवीनीकरण (Renewal) कराना और लीज रेंट जमा करना अनिवार्य होता है।

लेकिन, जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पट्टाधारकों ने न तो दशकों से किराया जमा किया और न ही लीज का नवीनीकरण कराया।

बिल्डर और पट्टाधारकों की मिलीभगत

जांच रिपोर्ट के अनुसार, सीता बेरी के उत्तराधिकारियों ने वर्ष 2012 में इस सरकारी जमीन को अपना बताकर एसए बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (SA Builders Pvt Ltd) के पक्ष में बेच दिया।

  • बड़ा फर्जीवाड़ा: रजिस्ट्री के समय भूमि को ‘फ्रीहोल्ड’ (निजी स्वामित्व वाली) दर्शाया गया।
  • सत्यता: सरकारी अभिलेखों में इस जमीन को फ्रीहोल्ड करने का कोई आदेश या साक्ष्य मौजूद नहीं था।
  • नियमों का उल्लंघन: बिना जिलाधिकारी (कलेक्टर) की अनुमति के नजूल जमीन का विक्रय करना कानूनन अपराध है।

डीएम की सख्त कार्रवाई और ‘सरकारी पुनर्प्रवेश’

उपजिलाधिकारी सदर और नजूल विभाग की संयुक्त जांच टीम ने जब फाइलों को खंगाला, तो अवैध सौदे की कलई खुल गई। इसके बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने ‘सरकारी पुनर्प्रवेश’ (Government Re-entry) का आदेश जारी किया।

“शहर के हृदय स्थल में स्थित इस बेशकीमती संपत्ति को अवैध रूप से अंतरित किया गया था। सार्वजनिक हित में इस भूमि को फिर से अनावंटित सरकारी भूमि के रूप में दर्ज किया गया है। अब इसकी जिम्मेदारी तहसीलदार सदर और नजूल प्रभारी को सौंप दी गई है।” – डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह

वर्तमान सर्किल रेट पर करोड़ों की कीमत

सिविल लाइंस कानपुर का सबसे महंगा इलाका माना जाता है। वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर इस 14/59ए भूखंड की कीमत 24 करोड़ 77 लाख रुपये आंकी गई है। प्रशासन अब इस जमीन पर बोर्ड लगाकर इसे अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।

Share This Article