मेला खत्म होने के बाद भी चल रहे थे अवैध झूले; विवाद होने पर दबंग संचालकों ने श्रद्धालुओं को लहूलुहान किया - NewsKranti

मेला खत्म होने के बाद भी चल रहे थे अवैध झूले; विवाद होने पर दबंग संचालकों ने श्रद्धालुओं को लहूलुहान किया

अरौल के मकनपुर मेले में झूला संचालकों ने मामूली विवाद पर जायरीनों और बच्चों पर जानलेवा हमला कर दिया। मेला खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से चल रहे झूलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • घटना स्थल: मकनपुर मेला, अरौल (कानपुर)।
  • आरोप: झूला संचालकों द्वारा सरिया और रॉड से हमला।
  • लापरवाही: मेला समाप्ति (3 फरवरी) के बाद भी अवैध संचालन जारी।
  • प्रशासनिक चूक: सुरक्षा व्यवस्था की कमी और पुलिस का संदिग्ध रवैया।
  • वायरल वीडियो: मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर सबूत के तौर पर मौजूद।

कानपुर (अरौल), 07 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक ‘मकनपुर मेले’ में उस समय चीख-पुकार मच गई, जब झूला संचालकों ने अपनी गुंडागर्दी का नंगा नाच दिखाया। मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि दबंग संचालकों ने जायरीनों, महिलाओं और मासूम बच्चों तक को नहीं बख्शा। लोहे की सरिया और रॉड से किए गए इस हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस पूरी घटना का रूह कपा देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव?

जानकारी के अनुसार, मकनपुर मेले में आए कुछ जायरीन अपने बच्चों के साथ झूला झूलने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि टिकट या झूला झूलने के समय को लेकर संचालकों से उनकी कुछ कहासुनी हुई। देखते ही देखते झूला संचालक और उनके दर्जनों कर्मचारी लामबंद हो गए। उन्होंने पास में रखे लोहे के सरिये और रॉड निकाल लिए और जायरीनों पर टूट पड़े।

जब बच्चों को पिटता देख परिजन बीच-बचाव करने आए, तो गुंडों ने उन्हें भी दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमला इतना अचानक और भीषण था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

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घायलों की हालत नाजुक, जिला अस्पताल रेफर

इस हमले में कई जायरीन लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बिल्हौर ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें कानपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। पीड़ितों के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोटें आई हैं।

प्रशासनिक लापरवाही: मेला खत्म, फिर भी चल रहे थे झूले?

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक तौर पर मकनपुर मेला 3 फरवरी को ही समाप्त हो चुका था। मेले की कमेटी के अध्यक्ष स्वयं एसडीएम बिल्हौर थे। सवाल यह उठता है कि जब मेला समाप्त हो चुका था, तो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर आसमानी झूले और दुकानें किसके आदेश पर संचालित की जा रही थीं? क्या यह सब पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा था?

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: शिकायत बदलवाने का आरोप

पीड़ितों ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। घायल जायरीनों का कहना है कि जब वे शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचे, तो पुलिस ने उनकी मूल तहरीर लेने से इनकार कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर शिकायत की भाषा बदलवा दी ताकि दबंग झूला संचालकों को बचाया जा सके। इस पक्षपातपूर्ण रवैये से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी रोष व्याप्त है।

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