कानपुर | 9 फरवरी, 2026 उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर में अपराध और धोखाधड़ी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कल्याणपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने मिलकर एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बोगस कंपनियां बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहा था। इस पूरे खेल में ₹2.66 करोड़ की जीएसटी चोरी की पुष्टि हुई है।
फर्जी फर्म और मूंगफली का व्यापार: ऐसे शुरू हुआ खेल
धोखाधड़ी के इस दिलचस्प मामले का खुलासा तब हुआ जब रावतपुर निवासी रवि प्रकाश, जो ‘अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी’ के मालिक हैं, ने जुलाई 2025 में कल्याणपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। रवि को तब गहरा धक्का लगा जब उन्हें पता चला कि उनकी फर्म के नाम और साख का इस्तेमाल कर किसी और ने फर्जी कागजात तैयार किए हैं।
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि इन जालसाजों ने रवि की फर्म के नाम पर फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाए। आरोपियों ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की विभिन्न कंपनियों के साथ मूंगफली की खरीद-बिक्री के झूठे दस्तावेज तैयार किए। इन कागजी सौदों का मकसद केवल जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाकर सरकारी खजाने को लूटना था।
पढ़े-लिखे मास्टरमाइंड: एक CA और एक व्यापारी पुलिस की गिरफ्त में
इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें शामिल लोगों की योग्यता है। पुलिस ने गहन जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो मुख्य अभियुक्तों को दबोचा है:
- एतिशाम: यह पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) है, जिसने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल टैक्स बचाने के बजाय टैक्स चोरी का जाल बुनने में किया।
- कमल गौरव साहू: एक स्थानीय व्यापारी, जो इस सिंडिकेट को जमीनी स्तर पर संचालित करने में मदद कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, सर्विलांस और स्वाट (SWAT) टीम ने महीनों तक डेटा खंगाला और बैंक खातों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा, जिसके बाद इन दोनों को सलाखों के पीछे भेजा गया।
मुख्य आरोपी फरार: पुलिस की टीमें दे रही हैं दबिश
भले ही पुलिस ने दो प्रमुख प्यादों को पकड़ लिया है, लेकिन इस पूरे स्कैम का ‘किंगपिन’ या मुख्य मास्टरमाइंड राकेश साहू अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। डीसीपी क्राइम ने बताया कि राकेश साहू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं और उसके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि राकेश के पकड़े जाने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कई और सफेदपोश चेहरों से नकाब हट सकता है।
कानपुर पुलिस की डिजिटल स्ट्राइक
इस मामले के खुलासे में डिजिटल फुटप्रिंट्स ने अहम भूमिका निभाई। आरोपियों ने जिन आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर जीएसटी पोर्टल पर फर्जी बिल अपलोड किए थे, पुलिस ने उन्हें ट्रैक कर लिया। डीसीपी श्रवण कुमार सिंह ने कहा, “यह केवल एक चोरी नहीं, बल्कि आर्थिक आतंकवाद है। हम इस नेटवर्क की जड़ तक जाएंगे ताकि भविष्य में कोई इस तरह का साहस न कर सके।”
