कानपुर नगर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में आगामी फिल्म और वेब कंटेंट ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विवाद गहरा गया है। फिल्म के शीर्षक और इसकी प्रचार सामग्री को सनातन संस्कृति और ब्राह्मण समाज का अपमान बताते हुए सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। समिति के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को थाना किदवई नगर में प्रदर्शन किया और थानाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के निर्माता, निर्देशक और पूरी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द पर प्रहार का आरोप
समिति द्वारा पुलिस को दिए गए आधिकारिक प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि फिल्म का शीर्षक न केवल विवादास्पद है, बल्कि यह जानबूझकर समाज के एक सम्मानित और पूजनीय वर्ग को निशाना बनाने के लिए रखा गया है। ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में विद्वत्ता, आध्यात्मिकता और सम्मान का प्रतीक है। इसे ‘घूसखोर’ जैसे नकारात्मक और भ्रष्ट विशेषण के साथ जोड़ना करोड़ों सनातनियों की आस्था पर गहरी चोट है।
समिति के पदाधिकारियों का तर्क है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित एजेंडा है जिसके तहत सनातन धर्म की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि कानपुर सहित पूरे प्रदेश में सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और जातिगत तनाव बढ़ने की आशंका भी पैदा हो गई है।
फिल्म निर्माता संघ (FMC) की ओर से भी लगा है झटका
इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब ज्ञापन में इस बात का उल्लेख किया गया कि फिल्म निर्माता संघ (FMC) ने पहले ही संबंधित फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार, फिल्म के शीर्षक के उपयोग के लिए आवश्यक नियमों और अनुमतियों का पालन नहीं किया गया है। यह नियमों का खुला उल्लंघन है, जिसे लेकर समिति ने पुलिस प्रशासन को आगाह किया है।
समिति की सख्त चेतावनी: “कानूनी लड़ाई को तैयार”
सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति के उपाध्यक्ष सुधीर द्विवेदी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए तीखे शब्दों में कहा, “‘घूसखोर पंडित’ कोई साधारण नाम नहीं है। यह हमारे पूजनीय पूर्वजों और संस्कृति को बदनाम करने की साजिश है। जब फिल्म निर्माता संघ खुद इसे नियमों के विरुद्ध मान रहा है, तो फिर प्रशासन किस बात का इंतजार कर रहा है? हम कानून को हाथ में नहीं लेना चाहते, लेकिन अगर हमारी भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो समिति इसके खिलाफ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”
