कानपुर: धर्मपुर गांव में 'लैंड माफिया' का जाल, कागजों में हेरफेर कर डकारे लाखों रुपये - NewsKranti

कानपुर: धर्मपुर गांव में ‘लैंड माफिया’ का जाल, कागजों में हेरफेर कर डकारे लाखों रुपये

कानपुर के सचेंडी इलाके में कृषि भूमि के नाम पर लाखों की ठगी का मामला। फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक सोसाइटी सचिव से करीब 1 करोड़ रुपये की जालसाजी। पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा।

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ख़बर एक नज़र में :
  • स्थान: धर्मपुर गांव, सचेंडी थाना क्षेत्र, कानपुर।
  • मुख्य आरोपी: पवन कुमार, नरेश कुमार, विजय कुमार, अजय कुमार, सावित्री देवी व अन्य।
  • धाराएं: धोखाधड़ी (420), जालसाजी (467, 468), मारपीट और धमकी।
  • ठगी की राशि: ₹93.80 लाख (मूल सौदा) + ₹10 लाख (अतिरिक्त उगाही)।

कानपुर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला सचेंडी थाना क्षेत्र के धर्मपुर गांव का है, जहां कृषि भूमि के फर्जी बैनामे के जरिए एक एग्रीकल्चर सोसाइटी से लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। इस पूरे खेल में आरोपियों ने न केवल असल हिस्से से अधिक जमीन बेची, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों की जमीन पर अपना दावा भी ठोक दिया। पुलिस ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए दो महिलाओं सहित कुल छह जालसाजों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

सोसाइटी सचिव ने खोली जालसाजी की परतें

पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पांडु नगर निवासी और एक एग्रीकल्चर सोसाइटी के सचिव विशाल भार्गव ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। विशाल के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2015 से जुड़ा है। उस समय उनके पिता सोसाइटी के अध्यक्ष थे और उन्होंने धर्मपुर गांव स्थित गाटा संख्या 410 और 406 की कृषि भूमि खरीदने का सौदा किया था।

93.80 लाख का सौदा और 10 लाख की अतिरिक्त उगाही

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन विक्रेताओं—पवन कुमार, नरेश कुमार, विजय कुमार, अजय कुमार और सावित्री देवी—ने मिलीभगत कर एक बड़ी साजिश रची।

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  • हकीकत छुपाई: आरोपियों ने रजिस्ट्री के दौरान अपने वास्तविक मालिकाना हक से कहीं अधिक जमीन दिखाकर बैनामा कर दिया।
  • कुल ठगी: जमीन की कुल कीमत 93 लाख 80 हजार रुपये थी।
  • धमका कर वसूले पैसे: जालसाजों ने फर्जी कागजात दिखाकर बाद में पीड़ित से 10 लाख रुपये अतिरिक्त भी ऐंठ लिए।

खतौनी में खेल और जान से मारने की धमकी

जालसाजी की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब शुरुआती दौर में तो जमीन सोसाइटी के नाम दर्ज हुई, लेकिन बाद में आरोपियों ने राजस्व दस्तावेजों और खतौनी में हेरफेर कराकर अन्य लोगों के नाम भी जुड़वा दिए। जब विशाल भार्गव ने इसकी जांच कराई और धोखाधड़ी पकड़ी गई, तो उन्होंने अपना पैसा वापस मांगा। आरोप है कि पैसे मांगने पर आरोपियों ने गाली-गलौज की और पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी।

10 जून को हुआ हमला: पुलिस ने शुरू की जांच

पीड़ित ने एफआईआर में बताया कि 10 जून 2024 को जब उन्होंने आरोपियों से संपर्क किया, तो उनके साथ मारपीट की गई। बीच-बचाव के बाद पीड़ित की जान बची। सचेंडी थाना प्रभारी ने मीडिया को बताया कि:

“विशाल भार्गव की तहरीर पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने , मारपीट और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। खतौनी में हुए बदलावों की भी गहनता से जांच की जा रही है।”

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