कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर में खाकी और काले कोट के बीच टकराव की स्थिति चरम पर पहुंच गई है। रेलबाजार थाना क्षेत्र में एक अधिवक्ता पर हुए जानलेवा हमले और उसके बाद पुलिस द्वारा पीड़ित अधिवक्ता को ही अपराधी की तरह हथकड़ी लगाकर अपमानित करने के मामले ने कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया है। बुधवार को द लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पंडित रवीन्द्र शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ ‘आर-पार’ की कार्रवाई की मांग की।
विवाद की जड़: सड़क पर दबंगई और खूनी संघर्ष
घटना की शुरुआत 18 जनवरी को हुई, जब अधिवक्ता फैयाज़ अपनी मां के साथ जा रहे थे। रास्ते में बाधा बन रही गाड़ियों को हटाने के अनुरोध पर क्षेत्रीय दबंगों—जीशान और दानिश—ने न केवल अभद्रता की, बल्कि आरोप है कि एक स्थानीय पार्षद के पुत्र के उकसावे पर करीब 15 लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस दौरान फैयाज़ का गला दबाया गया और उन्हें बचाने आई उनकी बुजुर्ग मां और भाई को भी बेरहमी से पीटा गया। यह पूरी वारदात सीसीटीवी फुटेज में कैद है।
थाने में इंसाफ का कत्ल: हथकड़ी और अपमान
अधिवक्ताओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में पुलिस की कार्यप्रणाली पर रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि जब पीड़ित फैयाज़ रिपोर्ट दर्ज कराने रेलबाजार थाने पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद पार्षद के रसूख के आगे पुलिस नतमस्तक हो गई। पुलिस ने पीड़ित को ही अंदर ले जाकर हथकड़ी लगा दी और जमीन पर बैठा दिया। यही नहीं, चौकी इंचार्ज पर ‘काले कोट’ को लेकर अत्यंत अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने दबाव में आकर अधिवक्ता के परिवार के खिलाफ ही ‘काउंटर एफआईआर’ दर्ज कर दी।
अधिवक्ता समाज की तीन बड़ी मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त से स्पष्ट लहजे में कहा कि जब तक निम्नलिखित कदम नहीं उठाए जाते, आंदोलन थमेगा नहीं:
- झूठा मुकदमा निरस्त हो: अधिवक्ता और उनके परिवार पर दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे को तुरंत वापस लिया जाए।
- चौकी इंचार्ज पर गाज गिरे: अधिवक्ता को हथकड़ी लगाने और अपमानित करने वाले चौकी इंचार्ज को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
- दबंगों की गिरफ्तारी: सीसीटीवी के आधार पर मुख्य हमलावरों को जेल भेजा जाए।
- प्रोटेक्शन एक्ट: उत्तर प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द ‘अधिवक्ता सुरक्षा कानून’ लागू करने की पुरजोर मांग की गई।
राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची शिकायत
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपियां भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजी गई हैं। पंडित रवीन्द्र शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया गया, तो कानपुर का पूरा अधिवक्ता समाज सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
फिलहाल, पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन शहर के वकीलों का गुस्सा किसी बड़े आंदोलन का संकेत दे रहा है।
