चांद से मिट्टी लाने की तैयारी: इसरो ने फाइनल की चंद्रयान-4 की लैंडिंग साइट, दक्षिण ध्रुव के इस पहाड़ पर रचेगा इतिहास - NewsKranti

चांद से मिट्टी लाने की तैयारी: इसरो ने फाइनल की चंद्रयान-4 की लैंडिंग साइट, दक्षिण ध्रुव के इस पहाड़ पर रचेगा इतिहास

Chandrayaan 4 Landing Site: इसरो ने खोजा चांद पर नया 'ठिकाना', दक्षिण ध्रुव के इस पहाड़ पर उतरेगा भारत का शूरवीर!

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ख़बर एक नज़र में :
  • लैंडिंग साइट: मॉन्स माउटन , दक्षिणी ध्रुव।
  • मिशन बजट: लगभग ₹2,104 करोड़।
  • लॉन्च का लक्ष्य: वर्ष 2027-2028 तक।
  • तकनीक: अंतरिक्ष में डॉकिंग और अन-डॉकिंग का सफल प्रदर्शन।
  • भविष्य का विजन: यह मिशन 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चांद पर भेजने के लक्ष्य का आधार बनेगा।

नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद, अब चंद्रयान-4 मिशन के लिए लैंडिंग साइट का चुनाव कर लिया गया है। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के बेहद रहस्यमयी और दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर स्थित ‘मॉन्स माउटन’ नामक ऊंचे पहाड़ के पास एक सुरक्षित स्थान को शॉर्टलिस्ट किया है।

MM-4: वो जगह जहाँ लैंड करेगा भारत का यान

इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों से मिली तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद ‘MM-4’ नामक साइट को सबसे उपयुक्त माना है। यह स्थान लगभग $84.289^\circ$ दक्षिण अक्षांश और $32.808^\circ$ पूर्वी देशांतर पर स्थित है।

क्यों चुनी गई यही जगह?

  1. कम ढलान: यहाँ की सतह का औसत ढलान मात्र 5 डिग्री है, जो लैंडर के सुरक्षित उतरने के लिए आदर्श है।
  2. सूरज की रोशनी: इस स्थान पर लगभग 11 से 12 दिनों तक लगातार सूर्य की रोशनी रहती है, जो सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों के लिए अनिवार्य है।
  3. वैज्ञानिक महत्व: यह क्षेत्र ऐसे गड्ढों (Craters) के करीब है जहाँ ‘वॉटर आइस’ (जमा हुआ पानी) होने की प्रबल संभावना है।

मिशन का मुख्य उद्देश्य: सैंपल रिटर्न

चंद्रयान-4 पिछले मिशनों से काफी अलग और जटिल होने वाला है। इसका मुख्य लक्ष्य चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने (लगभग 2 से 3 किलोग्राम) एकत्र करना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। अब तक यह उपलब्धि केवल अमेरिका, रूस और चीन ही हासिल कर पाए हैं।

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दो रॉकेट और पांच मॉड्यूल का ‘महा-मिशन’

इस मिशन की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे दो अलग-अलग हिस्सों में लॉन्च किया जाएगा:

  • लॉन्च 1: इसमें लैंडर और एसेंडर मॉड्यूल होंगे जो चांद पर उतरेंगे।
  • लॉन्च 2: इसमें ट्रांसफर और री-एंट्री मॉड्यूल होंगे जो नमूने लेकर वापस आएंगे।अतंरिक्ष में इन दोनों हिस्सों का ‘डॉकिंग’ (जुड़ना) होगा, जो इसरो के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती और उपलब्धि होगी।
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