कानपुर। शहर के नगर निगम मुख्यालय में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर रिश्वतखोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। हनुमंत विहार निवासी आशुतोष द्विवेदी ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय से शिकायत की कि नगर निगम के एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी विकास सिंह ने उनसे अपनी बेटी के जन्म प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन 1,500 रुपये लिए, लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी प्रमाणपत्र नहीं बनवाया। प्रारंभिक जांच के बाद तत्काल प्रभाव से आरोपी कर्मचारी विकास सिंह को कार्यमुक्त करते हुए उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जिससे नगर निगम में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि पिछले साल 13 जुलाई को वे अपनी बेटी ओयसी का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नगर निगम मुख्यालय स्थित जन्म-मृत्यु कार्यालय गए थे। वहां उनकी मुलाकात विकास सिंह से हुई, जिसने खुद को नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी बताया और जल्द से जल्द प्रमाणपत्र बनवाने का आश्वासन दिया। आशुतोष के मुताबिक, विकास ने इस काम के लिए उनसे ऑनलाइन माध्यम से 1500 रुपये की घूस ली।
टालमटोल और लापरवाही का सिलसिला
रिश्वत लेने के बावजूद विकास सिंह ने प्रमाणपत्र नहीं बनवाया। आशुतोष का आरोप है कि पिछले सात महीनों से विकास सिंह उन्हें हफ्ते-दस दिन में काम होने की बात कहकर टरकाता रहा। जब भी वे नगर निगम जाते, उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
आउटसोर्सिंग कर्मचारी की लापरवाही पर कार्रवाई
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि आउटसोर्सिंग पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर विकास सिंह डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत था। उसके खिलाफ लंबे समय से ड्यूटी पर लापरवाही बरतने और हाजिरी लगाकर चले जाने की शिकायतें मिल रही थीं। उसे कई बार चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया।
डॉ. अमित सिंह ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के नाम पर घूस लेने की गंभीर शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। विकास सिंह की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। ठेकेदार कंपनी जेटीएन, जो आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की आपूर्ति करती है, उसे विकास सिंह के स्थान पर तत्काल दूसरा कर्मी भेजने के लिए पत्र लिखा गया है।
भ्रष्टाचार पर नगर आयुक्त का सख्त रुख
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नगर निगम में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, लेकिन त्वरित कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
