कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘किसानों की आय दोगुनी करने’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए कानपुर नगर में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। कृषक समृद्धि आयोग के माननीय सदस्य कुलजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विकास का रोडमैप तैयार किया गया। बैठक का मुख्य केंद्र किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें वित्तीय संकट से उबारने के लिए सस्ती ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा।
सस्ता ऋण और आधुनिक तकनीक: समृद्धि का नया मंत्र
बैठक को संबोधित करते हुए कुलजीत सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने घोषणा की कि कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत अब किसानों को 11 लाख रुपये तक का ऋण अत्यंत रियायती दरों पर मिलेगा। यह ऋण मात्र 3 से 5 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध होगा।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “सरकार का उद्देश्य केवल कागजों पर लक्ष्य हासिल करना नहीं है, बल्कि किसान को इतना सक्षम बनाना है कि वह आधुनिक कृषि तकनीक अपना सके। जब किसान के पास पर्याप्त पूंजी होगी, तभी वह उन्नत बीज, खाद और यंत्रों का उपयोग कर अपनी उत्पादकता बढ़ा पाएगा।”
मत्स्य पालन और संबद्ध क्षेत्रों पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान केवल पारंपरिक खेती ही नहीं, बल्कि मत्स्य पालन, पशुपालन और उद्यानिकी जैसे क्षेत्रों पर भी गहन मंथन हुआ। कुलजीत सिंह ने जनपद में मत्स्य पालन से जुड़ी समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लिया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मछली पालन में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए।
उन्होंने कहा कि खेती के साथ-साथ सहायक उद्योगों का विकास ही किसानों की आय को दोगुना करने का सबसे कारगर रास्ता है। इसके लिए उन्होंने सिंचाई एवं नलकूप विभाग को जल आपूर्ति सुनिश्चित करने और उद्यान विभाग को नई फसलों के प्रति किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ की चेतावनी
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए आयोग के सदस्य ने स्पष्ट किया कि किसानों की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय (Co-ordination) के साथ काम करने की सलाह दी।
सिंह ने कहा, “जनपद स्तरीय अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े किसान तक पहुंचे। प्रचार-प्रसार की कमी के कारण कोई भी पात्र किसान लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।” उन्होंने शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निस्तारण के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला प्रशासन और कृषि विभाग के तमाम बड़े चेहरे मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से शिवम पाण्डेय, जिला कृषि अधिकारी प्राची पाण्डेय, जिला कृषि रक्षा अधिकारी सलीमुद्दीन, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) राकेश प्रभाकर, और अपर जिला कृषि अधिकारी शिवम शामिल थे। इसके अतिरिक्त मत्स्य और पशुपालन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने विभाग की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
