कानपुर किडनी रैकेट: मेड लाइफ अस्पताल सील

कानपुर किडनी रैकेट: मेड लाइफ अस्पताल सील, आहूजा और प्रिया हॉस्पिटल को नोटिस, 50 अन्य अस्पताल रडार पर!

कानपुर में किडनी तस्करी के काले कारोबार पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा प्रहार हुआ है। बिना पंजीकरण चल रहे मेड लाइफ अस्पताल को सील कर दिया गया है, जबकि आहूजा और प्रिया अस्पताल को गंभीर नोटिस थमाया गया है। प्रशासन अब शहर के 50 से अधिक संदिग्ध अस्पतालों की निगरानी कर रहा है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • कानपुर स्वास्थ्य विभाग ने मेड लाइफ अस्पताल को पूरी तरह सील किया।
  • रजिस्टर अस्पतालों—आहूजा और प्रिया हॉस्पिटल—पर नोटिस चस्पा, ट्रांसप्लांट नियमों के उल्लंघन का आरोप।
  • किडनी डोनर आयुष को अवैध रूप से भर्ती करने और मानक ताक पर रखने का मामला।
  • शहर के 50 से अधिक छोटे-बड़े अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की 'वॉच लिस्ट' में शामिल।
  • IMA ने डॉ. प्रीति आहूजा पर कार्रवाई के लिए कोर्ट के आदेश का इंतज़ार करने की बात कही।

कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में मानवता को शर्मसार करने वाले ‘किडनी रैकेट’ के खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने इस गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कमर कस ली है। ताजा कार्रवाई में प्रशासन ने आवास विकास-3 स्थित ‘मेड लाइफ हॉस्पिटल’ को सील कर दिया है। इसके साथ ही, शहर के प्रतिष्ठित आहूजा और प्रिया अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया गया है।

मेड लाइफ अस्पताल पर गिरी गाज

सीएमओ (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि अंबेडकरपुरम स्थित मेड लाइफ अस्पताल बिना किसी वैध पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अस्पताल में न तो कोई योग्य डॉक्टर मिला और न ही प्रशिक्षित स्टाफ, फिर भी यहाँ किडनी डोनर आयुष को भर्ती किया गया था। मानकों की घोर अनदेखी और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के चलते विभाग ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया है।

आहूजा और प्रिया अस्पताल पर लटकी तलवार

किडनी रैकेट के तार शहर के अन्य बड़े अस्पतालों से भी जुड़े होने की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान आहूजा और प्रिया अस्पताल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन अस्पतालों पर आरोप है कि इन्होंने बिना सुपर स्पेशलिस्ट विशेषज्ञों के और बिना उचित ट्रांसप्लांट लाइसेंस के मरीजों का इलाज किया। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इन अस्पतालों के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया। प्रशासन का मानना है कि ये अस्पताल किडनी तस्करी गिरोह के लिए ‘सेफ हाउस’ या बैकअप के तौर पर काम कर रहे थे।

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50 अस्पताल निगरानी में, खुफिया तंत्र सक्रिय

इस कार्रवाई से कानपुर के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि अब शहर के 50 से अधिक ऐसे अस्पताल जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, उनकी निगरानी बढ़ा दी गई है। खुफिया तंत्र (एलआईयू) को सक्रिय कर दिया गया है ताकि अस्पतालों के भीतर होने वाली गोपनीय डीलिंग का पता लगाया जा सके। सूत्रों की मानें तो इस रैकेट के तार कानपुर के अलावा लखनऊ, दिल्ली और एनसीआर के कई बड़े केंद्रों से भी जुड़े हो सकते हैं।

IMA का रुख: कोर्ट के फैसले का इंतज़ार

इस पूरे प्रकरण में आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा का नाम आने से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भी बैकफुट पर है। डॉ. प्रीति वर्तमान में आईएमए कानपुर की उपाध्यक्ष हैं। परेड स्थित आईएमए हॉल में हुई आपात बैठक में कार्यकारिणी ने निर्णय लिया है कि जब तक कोर्ट में दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद ही हेडक्वार्टर को पत्र लिखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और उन सफेदपोश चेहरों की तलाश कर रही है जो इस रैकेट को संरक्षण दे रहे थे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह केवल शुरुआत है, और आने वाले दिनों में कई और बड़े क्लीनिकों और अस्पतालों पर छापेमारी की जा सकती है।

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