कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। चकेरी थाना क्षेत्र के संजीव नगर में एक 58 वर्षीय एयरफोर्स कर्मी ने बीमारी के असहनीय दर्द और उसके कारण उपजे मानसिक तनाव से हार मानकर मौत को गले लगा लिया। मृतक ने अपने ही घर में खुद को आग के हवाले कर दिया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
बीमारी बनी काल: ऑपरेशन के बाद भी नहीं मिला आराम
मृतक रामशंकर कश्यप भारतीय वायुसेना (IAF) में सिविलियन मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) के पद पर तैनात थे। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि रामशंकर पिछले काफी समय से स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) की एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी के कारण उनका उठना-बैठना और चलना-फिरना दूभर हो गया था। परिजनों ने उनका बेहतर से बेहतर इलाज कराया और कुछ समय पूर्व उनका बड़ा ऑपरेशन भी हुआ था। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था; ऑपरेशन के बावजूद उनके दर्द में कोई कमी नहीं आई और शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ वह गहरे अवसाद (Depression) में चले गए।
शाम को घर में मची चीख-पुकार
घटना रविवार शाम करीब 7:30 बजे की है। जब घर के अन्य सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे, तभी रामशंकर ने कमरे में खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली। देखते ही देखते आग की लपटों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। उनकी चीखें सुनकर परिजन और पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह आग को बुझाया। आनन-फानन में उन्हें गंभीर हालत में उर्सला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन शरीर का काफी हिस्सा जल जाने के कारण डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पुलिस की तफ्तीश और जांच के दायरे
घटना की सूचना मिलते ही चकेरी थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिजनों के बयान दर्ज किए। चकेरी पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला बीमारी से परेशान होकर की गई आत्महत्या का ही लग रहा है। पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इलाके में शोक की लहर
रामशंकर कश्यप अपने व्यवहार के लिए पड़ोसियों में काफी लोकप्रिय थे। उनकी इस तरह की दर्दनाक विदाई ने संजीव नगर इलाके के लोगों की आंखें नम कर दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह एक अनुशासित कर्मी थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से बीमारी ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था।
