Kanpur News: डॉक्टर बनने के साथ समाजसेवा, GSVVM मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र बच्चों को कर रहे शिक्षित – NewsKranti

Kanpur News: डॉक्टर बनने के साथ समाजसेवा, GSVVM मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र बच्चों को कर रहे शिक्षित

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ गरीब और अशिक्षित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।

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Highlights
  • जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र चला रहे शिक्षा अभियान
  • मलिन बस्तियों व कॉलेज परिसर के गरीब बच्चों को पढ़ा रहे
  • पॉकेट मनी से किताबें, कॉपी और फीस की व्यवस्था
  • सरकारी व निजी स्कूलों में दिला रहे प्रवेश
  • 3 बच्चों का नवोदय विद्यालय में चयन
  • वर्तमान में 30 बच्चों को नियमित पढ़ाई
  • कॉलेज प्राचार्य ने जर्जर क्वार्टर मरम्मत कर पढ़ाई के लिए दिए
  • दो साल पहले शुरू हुई पहल, अब दर्जनों छात्र जुड़े

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्रों ने समाजसेवा की एक मिसाल पेश की है। डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे ये छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मलिन बस्तियों और कॉलेज परिसर के गरीब व अशिक्षित बच्चों को शिक्षा की रोशनी देने का काम कर रहे हैं।

एमबीबीएस के छात्रों ने न केवल बच्चों को मुफ्त पढ़ाना शुरू किया, बल्कि अपनी पॉकेट मनी से किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई। पढ़ाई में रुचि और क्षमता दिखाने वाले बच्चों को सरकारी प्राथमिक विद्यालय, निजी स्कूल और नवोदय विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया गया।

एमबीबीएस फाइनल ईयर की छात्रा संस्कृति गुप्ता ने बताया कि दो साल पहले यह पहल पैरा पी-2 के उत्कर्ष शर्मा, पैरा क्यू-2 की संस्कृति गुप्ता और रोहन मिश्रा ने शुरू की थी। धीरे-धीरे पैरा आर-2 और पैरा एस-2 के छात्र भी इस अभियान से जुड़ते चले गए। वर्तमान में 29 मेडिकल छात्र मिलकर करीब 30 बच्चों को नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं।

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अब कक्षा 9 और 10 तक के छात्र भी पढ़ाई के लिए आ रहे हैं। तीन बच्चों का नवोदय विद्यालय में चयन हो चुका है, जबकि तीन-चार बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है। निजी स्कूलों की फीस सभी छात्र आपस में मिलकर वहन करते हैं।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने छात्रों के इस शिक्षा दान को गर्व का विषय बताया। उन्होंने दो जर्जर सर्वेंट क्वार्टर की मरम्मत कराकर बच्चों के बैठने और पढ़ने के लिए उपलब्ध करा दिए।

भावी डॉक्टरों की यह पहल न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव ला रही है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गई है।

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