कानपुर नगर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से जनपद कानपुर की समस्त 590 ग्राम पंचायतों में ‘विकसित भारत–गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जीरामजी अधिनियम-2025 की गूँज सुनाई दी। जिला प्रशासन के निर्देश पर आयोजित इन विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को उनके नए अधिकारों और रोजगार की नई गारंटी से रूबरू कराया गया।
125 दिन का काम: श्रमिकों के लिए नई सौगातग्राम सभाओं के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि नए अधिनियम के तहत अब ग्रामीण श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। यह पहले की 100 दिनों की व्यवस्था से 25% अधिक है। इस बदलाव से ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
काम नहीं तो भत्ता: अधिकार हुआ और भी मजबूतअधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बेरोजगारी भत्ता है। यदि कोई श्रमिक कार्य की मांग करता है और प्रशासन उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रहता है, तो संबंधित श्रमिक को बेरोजगारी भत्ता पाने का विधिक अधिकार होगा। यह प्रावधान सरकारी मशीनरी की जवाबदेही तय करेगा और श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगा।
इन विकासखंडों में दिखा विशेष उत्साहजन-जागरूकता कार्यक्रम के तहत भीतरगांव की ग्राम पंचायत हाजीपुर कदीम, पतारा की नंदना, बिधनू की सीढ़ी और सरसौल की महुआगांव में खंड विकास अधिकारियों (BDO) की मौजूदगी में बड़ी ग्राम सभाएं हुईं। ग्रामीणों को पम्पलेट बांटकर योजना की मजदूरी दरों और पंजीकरण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाया गया।
अधिकारियों का वक्तव्य
उपायुक्त श्रम एवं रोजगार, चन्द्र मोहन कनौजिया ने कहा, “यह अधिनियम ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। 125 दिनों की रोजगार गारंटी और बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान न केवल पलायन को रोकेगा, बल्कि ग्रामीण परिवारों को अपने ही गांव में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देगा।”
