कानपुर: शहर के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले छात्र कुशाग्र कनोड़िया हत्याकांड में आखिरकार इंसाफ की घड़ी करीब आ गई है। कानपुर की स्थानीय अदालत ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए तीनों मुख्य आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। इस फैसले के बाद कुशाग्र के परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है, हालांकि उनकी मांग केवल फांसी की सजा है।
क्या थी पूरी घटना?
विदित हो कि उद्योगपति मनीष कनोड़िया के बेटे कुशाग्र कनोड़िया का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात को किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि कुशाग्र को ट्यूशन पढ़ाने वाली शिक्षिका रचिता त्रिपाठी ने अपने प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा के साथ मिलकर अंजाम दिया था। आरोपियों ने फिरौती के लिए कुशाग्र का अपहरण किया था, लेकिन पकड़े जाने के डर से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी और शव को स्टोर रूम में छिपा दिया था।
अदालत की कार्यवाही और दोषसिद्धि
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने ठोस सबूत और गवाह पेश किए। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ अहम भूमिका निभाई। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए रचिता, प्रभात और शिवा को आईपीसी की संबंधित धाराओं (अब बीएनएस) के तहत हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी पाया। न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों को कस्टडी में लेने का आदेश दिया।
परिजनों की आंखों में आंसू और न्याय की पुकार
कोर्ट परिसर में मौजूद कुशाग्र के माता-पिता फैसले को सुनकर भावुक हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारे बेटे को कभी वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन इन दरिंदों को समाज में रहने का कोई हक नहीं है। हम चाहते हैं कि कोर्ट इन्हें फांसी की सजा सुनाए ताकि फिर कभी कोई रचिता किसी कुशाग्र की जान न ले सके।”
22 जनवरी पर टिकी सबकी निगाहें
अब पूरे शहर की निगाहें 22 जनवरी पर टिकी हैं, जब कोर्ट इन तीनों दोषियों के खिलाफ सजा मुकर्रर करेगी। कानून के जानकारों का मानना है कि यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस की श्रेणी में आ सकता है, जिसमें उम्रकैद या फांसी तक की सजा का प्रावधान है।
