लखनऊ, 24 जनवरी:
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए राजनीति और धर्म के बढ़ते जुड़ाव पर बड़ा प्रहार किया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक त्योहारों, पूजा-पाठ और आस्था से जुड़े आयोजनों में राजनीतिक दखल बढ़ गया है, जो समाज में तनाव और संघर्ष पैदा कर रहा है।
प्रयागराज विवाद का दिया उदाहरण
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बसपा मुखिया ने प्रयागराज के माघ मेले में चल रहे विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच जो गतिरोध पैदा हुआ है, वह राजनीति के अनावश्यक हस्तक्षेप का ही नतीजा है। उन्होंने इस कड़वे विवाद को जल्द से जल्द आपसी सहमति से सुलझाने की सलाह दी ताकि आस्था के केंद्र में शांति बनी रहे।
संविधान की दी याद
मायावती ने कहा कि भारत का संविधान और कानून पूरी ईमानदारी से जनहित को ही वास्तविक ‘राष्ट्रीय धर्म’ मानता है। संविधान राजनीति को धर्म से दूर रखने की वकालत करता है ताकि राजनेता बिना किसी द्वेष या पक्षपात के सर्वसमाज के हित में काम कर सकें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज राजनेता अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने के बजाय धार्मिक आयोजनों में हस्तक्षेप कर अपना स्वार्थ साध रहे हैं।
धक्का-मुक्की और नोटिस की घटना
गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के स्नान के दौरान पुलिस के साथ उनके शिष्यों की धक्का-मुक्की हुई थी। प्रशासन ने शंकराचार्य को दो नोटिस भी जारी किए थे, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मायावती ने इसी ओर इशारा करते हुए कहा कि एक-दूसरे का अनादर और आरोप-प्रत्यारोप किसी भी दृष्टि से सही नहीं है।
मायावती ने अंत में ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की शुभकामनाएं देते हुए जनता से शांति और भाईचारे की अपील की।
