सड़क हादसों में अब ‘नो इन्कार’: कानपुर में घायल का 7 दिन तक ₹1.5 लाख का इलाज होगा कैशलेस, डीएम का सख्त फरमान – NewsKranti

सड़क हादसों में अब ‘नो इन्कार’: कानपुर में घायल का 7 दिन तक ₹1.5 लाख का इलाज होगा कैशलेस, डीएम का सख्त फरमान

केंद्र सरकार की नई 'कैशलेस उपचार योजना–2025' को लेकर कानपुर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। अब कोई भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम सड़क हादसे के घायलों को इलाज के लिए मना नहीं कर सकेगा और न ही परिजनों से पैसे मांग सकेगा। गोल्डन ऑवर का महत्व: समय पर इलाज सुनिश्चित कर कीमती जान बचाना प्राथमिकता।

Saniya Soni
3 Min Read
Highlights
  • कैशलेस इलाज: दुर्घटना के पहले 7 दिनों तक अधिकतम ₹1,50,000 तक का उपचार पूरी तरह मुफ्त।
  • अस्पतालों को चेतावनी: निजी अस्पताल या नर्सिंग होम इलाज से इनकार नहीं कर सकते।
  • पैसे मांगना मना: घायल को लाने वाले राहगीर या परिजनों से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा।
  • सख्त कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों का लाइसेंस रद्द और कानूनी कार्रवाई संभव।

कानपुर नगर। सड़क दुर्घटनाओं में समय पर इलाज न मिलने के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने जिले के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अब जिले का कोई भी अस्पताल सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को उपचार देने से पीछे नहीं हट सकता।

क्या है कैशलेस उपचार योजना–2025?

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, सड़क दुर्घटना की तिथि से अगले 7 दिनों तक घायल व्यक्ति का इलाज पूरी तरह कैशलेस होगा। इस योजना के अंतर्गत घायल व्यक्ति के लिए अधिकतम ₹1.50 लाख तक की उपचार राशि निर्धारित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के तुरंत बाद का समय) में घायल को बिना किसी आर्थिक अड़चन के जीवन रक्षक उपचार उपलब्ध कराना है।

राहगीरों और परिजनों को बड़ी राहत

अक्सर देखा जाता है कि घायल को अस्पताल पहुँचाने वाले राहगीर पुलिसिया कार्रवाई या अस्पताल के खर्चे के डर से मदद को आगे नहीं आते थे। डीएम ने इसे खत्म करते हुए निर्देश दिया है कि घायल को अस्पताल लाने वाले किसी भी राहगीर, परिचित या परिजन से इलाज के नाम पर एक रुपये की भी मांग नहीं की जाएगी। अस्पताल को सीधे सरकार से भुगतान की प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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नियमों की अनदेखी पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम ने घायल को भर्ती करने में आनाकानी की या इलाज से इनकार किया, तो इसे सरकारी आदेशों की अवहेलना और मानवता के विरुद्ध अपराध माना जाएगा। ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनके लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।

प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सड़क हादसों में घायलों की मदद के लिए निडर होकर आगे आएं। यदि कोई अस्पताल पैसे मांगता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो तुरंत इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम को दें।

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