नई दिल्ली/जगदलपुर: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी दशकों तक नक्सली हिंसा और माओवाद के साये में रहा, आज अपनी सांस्कृतिक समृद्धि और विकास की नई इबारत लिख रहा है। 7 से 9 फरवरी तक आयोजित हुए ‘बस्तर पांडुम-2026’ महोत्सव की भव्य सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि बस्तर अब “बारूद” के लिए नहीं, बल्कि अपने “आत्मविश्वास” और “अतुलनीय जनजातीय विरासत” के लिए जाना जा रहा है।
“पहले माओवाद का डर था, अब विकास का दौर है”
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि एक समय था जब बस्तर का नाम सुनते ही मन में हिंसा, माओवाद और पिछड़ेपन की तस्वीर उभरती थी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
पीएम मोदी ने कहा, “आज बस्तर न केवल विकास के लिए, बल्कि यहाँ के स्थानीय लोगों के भीतर बढ़ते आत्मविश्वास के लिए भी पहचाना जाता है। बस्तर पांडुम जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।”
बस्तर पांडुम: जनजातीय गौरव का महाकुंभ
तीन दिवसीय ‘बस्तर पांडुम’ महोत्सव का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। इस कार्यक्रम में बस्तर की 12 से अधिक विधाओं—जैसे पारंपरिक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प, वनौषधि और जनजातीय व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। 55 हजार से अधिक लोगों ने इस सांस्कृतिक महाकुंभ में हिस्सा लेकर यह साबित कर दिया कि बस्तर के लोग अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और शांति की राह पर अग्रसर हैं।
शांति और प्रगति की कामना
प्रधानमंत्री ने बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि आने वाला समय यहाँ के लोगों के लिए शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण हो। उन्होंने इस महोत्सव के सफल आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और बस्तर के निवासियों को बधाई दी।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी समापन समारोह में हिस्सा लिया था और कहा था कि मोदी सरकार बस्तर की कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बस्तर की पहचान अब ‘नक्सलवाद’ नहीं बल्कि ‘ब्रांड बस्तर’ है।
