कानपुर मेट्रो: कॉरिडोर-2 की दूसरी ट्रेन का सीएसए डिपो में आगमन, 2026 तक शुरू होगा ट्रायल - NewsKranti

कानपुर मेट्रो: कॉरिडोर-2 की दूसरी ट्रेन का सीएसए डिपो में आगमन, 2026 तक शुरू होगा ट्रायल

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कानपुर | उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) के निर्माण में एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। सीएसए परिसर स्थित निर्माणाधीन डिपो में कॉरिडोर-2 के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई दूसरी मेट्रो ट्रेन सफलतापूर्वक पहुंच गई है। पहली ट्रेन आने के मात्र एक महीने के भीतर दूसरी ट्रेन का आना परियोजना की तीव्र गति को दर्शाता है।

अत्याधुनिक कोचों की सुरक्षित अनलोडिंग

गुजरात के सावली स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत निर्मित इस ट्रेन के तीनों कोचों को विशेष क्रेनों की मदद से ट्रैक पर उतारा गया। प्रत्येक कोच का वजन लगभग 40 टन है। अधिकारियों के अनुसार, अगले एक सप्ताह के भीतर तीसरी ट्रेन के भी कानपुर पहुंचने की उम्मीद है। कॉरिडोर-2 के लिए कुल 10 ट्रेनों की आपूर्ति की जानी है।

2026 के मध्य तक तैयार होगा हाई-टेक डिपो

सीएसए परिसर में 15 हेक्टेयर में बन रहा यह डिपो वर्ष 2026 के मध्य तक पूरी तरह कार्यात्मक हो जाएगा। डिपो की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

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  • 15 ट्रैक का जाल: यहाँ वर्कशॉप, स्टेबलिंग, इंस्पेक्शन और टेस्ट ट्रैक के लिए कुल 15 लाइनें बिछाई जा रही हैं।
  • थर्ड-रेल प्रणाली: कानपुर मेट्रो पारंपरिक ओएचई के बजाय 750 वोल्ट डीसी ‘थर्ड-रेल’ प्रणाली पर चलेगी, जिसका इंस्टॉलेशन कार्य जारी है।
  • टेस्ट ट्रैक: डिपो के भीतर 550 मीटर लंबा टेस्ट ट्रैक बनाया जा रहा है, जहाँ 2026 की शुरुआत में ट्रेनों की टेस्टिंग शुरू होगी।

सिग्नलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

डिपो के भीतर अत्याधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली (27 पॉइंट मशीनें, 31 सिग्नल और 55 एक्सल काउंटर) स्थापित की जा रही है। साथ ही, ट्रेनों के रखरखाव के लिए 15 मीटर ऊंची ‘प्री-इंजीनियर्ड’ वर्कशॉप बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें सोलर पैनल और आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम होगा।

ईको-फ्रेंडली और जीरो वेस्ट कैंपस

यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने बताया कि यह डिपो पर्यावरण के अनुकूल होगा। यहाँ 1500 वर्ग मीटर में ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी और यह पूरी तरह से ‘जीरो वेस्ट डिस्चार्ज’ मॉडल पर आधारित होगा।

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