कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने आधुनिक युग में सोशल मीडिया और यूट्यूब के बढ़ते जुनून के काले पक्ष को उजागर कर दिया है। गुजैनी थाना क्षेत्र में महज 10 साल के एक मासूम बच्चे ने जब अपनी मां को फोन कर कहा कि उसका “अपहरण” हो गया है, तो पूरे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि, पुलिसिया जांच और बच्चे के बयान के बाद जो सच सामने आया, उसने न केवल पुलिस बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
25 मिनट का वो खौफनाक मंजर: 2 लाख से 5 हजार तक पहुंची डील
घटना बुधवार शाम की है। गुजैनी का रहने वाला 10 वर्षीय बालक घर के पास ही सब्जी लेने निकला था। काफी देर तक जब वह नहीं लौटा, तो मां की चिंता बढ़ने लगी। तभी मां के फोन पर एक कॉल आई। दूसरी तरफ बेटे की रोने जैसी आवाज थी, जिसने कहा— “मम्मी, मुझे कुछ लोगों ने पकड़ लिया है, ये लोग 2 लाख रुपये मांग रहे हैं, वरना मुझे मार देंगे।”
इतना सुनते ही मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। बदहवास परिवार ने तुरंत गुजैनी पुलिस को सूचना दी। अभी पुलिस घेराबंदी की तैयारी कर ही रही थी कि 25 मिनट बाद दूसरे नंबर से कॉल आई। इस बार अपहरणकर्ताओं (जो असल में किशोर यूट्यूबर थे) ने रकम घटाकर 5 हजार रुपये कर दी।
यूट्यूबरों की करतूत: वीडियो वायरल करने की सनक में पार की हदें
कुछ ही देर बाद बच्चा सुरक्षित घर लौट आया और उसने जो बताया वह हैरान करने वाला था। बच्चे ने खुलासा किया कि रास्ते में उसे 14-15 साल के दो किशोर मिले थे। उन्होंने खुद को यूट्यूबर बताया और कहा कि वे एक “प्रैंक वीडियो” शूट कर रहे हैं।
- उकसावा: उन किशोरों ने बच्चे को लालच और दबाव के जरिए अपनी ही मां को फोन करने को कहा।
- स्क्रिप्ट: उन्होंने बच्चे को सिखाया कि कैसे रोना है और कैसे फिरौती मांगनी है।
- मकसद: इस पूरे ड्रामे को रिकॉर्ड कर यूट्यूब पर ‘लाइव किडनैपिंग प्रैंक’ के नाम से वायरल करना था।
पुलिस की कार्रवाई: प्रैंक के नाम पर ‘अपराध’ बर्दाश्त नहीं
बच्चे के परिजनों की शिकायत पर गुजैनी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। पुलिस ने अज्ञात किशोरों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
अधिकारियों का बयान: क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी ने बताया— “यह महज एक शरारत नहीं बल्कि एक गंभीर मानसिक उत्पीड़न और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ है। जिन मोबाइल नंबरों से कॉल की गई थी, उन्हें सर्विलांस पर ले लिया गया है। उन यूट्यूबरों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
विशेषज्ञों की राय: सोशल मीडिया का यह कैसा पागलपन?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लाइक्स और व्यूज की भूख किशोरों को अपराधी बनाने की राह पर ले जा रही है। किसी मासूम को डराकर या उसे मोहरा बनाकर इस तरह के वीडियो बनाना कानूनन जुर्म है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को अजनबियों से बात न करने और ऐसे ‘प्रैंक’ का हिस्सा न बनने की सलाह देनी चाहिए।
