नई दिल्ली | दुनिया के नक्शे पर जब भी युद्ध की लकीरें खिंचती हैं, उसकी सबसे पहली तपिश ऊर्जा बाज़ार (Energy Market) में महसूस होती है। वर्तमान में ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। भारत अपनी ज़रूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ जैसे संवेदनशील रास्तों से आता है। लेकिन, इस वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय रेलवे से एक ऐसी खबर आई है जो देश को आत्मनिर्भरता की नई संजीवनी दे रही है।
मिशन 100% के करीब: आंकड़ों की जुबानी
मार्च 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे का विशाल ब्रॉड गेज नेटवर्क अब लगभग पूरी तरह बिजली से चलने की दहलीज़ पर है।
- कुल ट्रैक: करीब 70,001 किलोमीटर।
- इलेक्ट्रिफाई नेटवर्क: 69,427 किलोमीटर (99.4%)।
- शेष हिस्सा: मात्र 0.6% हिस्सा अब भी डीजल पर निर्भर है, जो जल्द ही इतिहास बन जाएगा।
डीजल की ‘घरघराहट’ शांत, अरबों की बचत
रेलवे का यह बदलाव सिर्फ पटरियों पर तार बिछाना नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। 2024-25 के दौरान रेलवे ने लगभग 178 करोड़ लीटर डीजल की बचत की है। 2016-17 की तुलना में डीजल खपत में 62% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। बिजली से चलने वाली ट्रेनें डीजल की तुलना में 70% अधिक किफायती हैं, जिसका सीधा लाभ रेलवे की परिचालन लागत कम करने और यात्रियों को सस्ता किराया देने में मिलता है।
सौर ऊर्जा: पटरियों पर उतरता सूरज
रेलवे अब केवल ग्रिड की बिजली पर निर्भर नहीं है। पिछले एक दशक में सौर ऊर्जा की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है:
- 2014 की क्षमता: 3.68 मेगावाट।
- 2025 (नवंबर) की क्षमता: 898 मेगावाट।
- आज देश के 2,600 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर सोलर पैनल लगे हैं। रेलवे का लक्ष्य 2030 तक ‘नेट ज़ीरो कार्बन एमिटर’ बनने का है, जिसके लिए 10 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा की योजना तैयार है।
ऊर्जा सुरक्षा: युद्ध के खतरों के खिलाफ ढाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं या आपूर्ति बाधित होती है, तो रेलवे का बिजलीकरण भारत के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेगा। राइडिंग सनबीम्स (Riding Sunbeams) के सीईओ लियो मरे के अनुसार, “भारत ने इतनी तेजी से बदलाव करके दुनिया को दिखा दिया है कि बुनियादी ढांचा और जलवायु लक्ष्य साथ-साथ कैसे चल सकते हैं।”
“भारत में रेल इलेक्ट्रिफिकेशन सिर्फ इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक बड़ी संरचनात्मक आर्थिक कहानी है जो सस्ती मोबिलिटी और आत्मनिर्भरता को जोड़ती है।” – महक अग्रवाल, प्रतिनिधि, राइडिंग सनबीम्स
निष्कर्ष: एक शांत क्रांति की गूंज
भारतीय रेलवे अब डीजल इंजनों के धुएं और शोर से निकलकर बिजली की शांत और तेज रफ्तार यात्रा की ओर बढ़ चुकी है। जब दुनिया तेल के लिए संघर्ष कर रही है, भारत अपनी पटरियों को भविष्य के लिए सुरक्षित कर चुका है।
