इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। जस्टिस वर्मा ने संसद में उनके खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को नोटिस जारी कर 7 जनवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
जस्टिस वर्मा ने नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास से जला हुआ कैश मिलने के मामले के बाद हटाने की कार्रवाई को चुनौती दी है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति को अवैध बताया। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता ने टिप्पणी की, क्या कानून बनाने वालों को ये भी नहीं पता कि ऐसा नहीं किया जा सकता
याचिका में कहा गया कि जजेज़ इन्क्वायरी एक्ट 1968 के अनुसार, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दोनों सदनों में लाया जाता है, तो जांच समिति का गठन भी लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त प्रक्रिया से होना चाहिए। केवल लोकसभा अध्यक्ष द्वारा समिति बनाना कानूनन सही नहीं है।
जस्टिस वर्मा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच समिति का गठन दोनों सदनों की साझा प्रक्रिया से होना आवश्यक था। इसके अलावा महाभियोग प्रस्ताव को दोनों सदनों से एक ही दिन में पारित करने की संवैधानिक शर्त का पालन नहीं किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों के जवाब के आधार पर यह तय करेगी कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया संविधान और कानून के अनुरूप है या नहीं।
