सोता रहा नगर निगम, जाग उठे मोहल्ले वाले! दबौली में 'ढोल-मंजीरा' बजाकर किया सफाई व्यवस्था का 'कीर्तन' - NewsKranti

सोता रहा नगर निगम, जाग उठे मोहल्ले वाले! दबौली में ‘ढोल-मंजीरा’ बजाकर किया सफाई व्यवस्था का ‘कीर्तन’

कानपुर के दबौली वेस्ट वार्ड 72 में सफाई व्यवस्था ठप होने से गुस्साए स्थानीय लोगों ने ढोल-मंजीरा बजाकर नगर निगम और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया।

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ख़बर एक नज़र में :
  • अनोखा विरोध: दबौली वेस्ट के लोगों ने ढोल-मंजीरा बजाकर प्रशासन का ध्यान खींचा।
  • प्रमुख समस्याएं: सीवर ओवरफ्लो, जलभराव, टूटी सड़कें और नियमित सफाई का न होना।
  • निशाने पर दिग्गज: महापौर और स्थानीय विधायक के खिलाफ जमकर हुआ आक्रोश प्रदर्शन।
  • स्वास्थ्य का खतरा: गंदगी के कारण मोहल्ले में संक्रामक रोगों के फैलने का डर।
  • अल्टीमेटम: समाधान न होने पर नगर निगम मुख्यालय के घेराव की चेतावनी।

कानपुर | 09 फरवरी, 2026 स्मार्ट सिटी कानपुर के दावों की हवा एक बार फिर दबौली वेस्ट (वार्ड संख्या 72) में निकलती दिखाई दी। जब शिकायतों और प्रार्थना पत्रों का कोई असर नहीं हुआ, तो यहाँ के निवासियों ने विरोध का एक ऐसा तरीका चुना जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बुधवार को मोहल्ले के लोग हाथों में ढोल, मंजीरे और झांझ लेकर सड़कों पर उतर आए और “नगर निगम की लापरवाही” का सस्वर पाठ करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।

गंदगी के ढेर और सीवर की सड़ांध: नारकीय हुआ जीवन

दबौली वेस्ट के निवासियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले कई सालों से वार्ड की सड़कों का बुरा हाल है। सीवर लाइनें चोक पड़ी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। स्थानीय निवासी सुधीर मिश्रा ने बताया, “हमारे बच्चे स्कूल जाने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरते हैं। बुजुर्गों का घर से निकलना दूभर हो गया है। नालियां महीनों से साफ नहीं हुई हैं, जिससे मच्छरों का आतंक बढ़ गया है और लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।”

ढोल की थाप पर सुनाई जनप्रतिनिधियों को खरी-खरी

प्रदर्शन के दौरान नजारा किसी शोभायात्रा जैसा था, लेकिन इसमें उत्साह नहीं, बल्कि आक्रोश भरा था। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर महापौर, क्षेत्रीय विधायक और पार्षद के खिलाफ तीखी टिप्पणियां लिखी थीं। लोगों ने ढोल-मंजीरे बजाते हुए कहा कि अब तक अधिकारी और जनप्रतिनिधि “कुंभकर्णी नींद” में सोए हुए थे, शायद इस शोर से उनकी नींद खुल जाए।

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प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले बड़े-बड़े नेता अब समस्याओं के समय गायब हैं। पार्षद कार्यालय के चक्कर काट-काट कर लोग थक चुके हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ।

कूड़े के पहाड़ और जाम नालियां

इलाकाई महिलाओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि घर-घर से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां कई-कई दिनों तक नहीं आतीं। मोहल्ले के कोनों पर कूड़े के ढेर लग गए हैं, जिसकी दुर्गंध से घरों के अंदर बैठना भी मुश्किल हो गया है। जलभराव की समस्या इतनी विकट है कि बिना बारिश के भी गलियां तालाब बनी रहती हैं, जिससे सड़क की निर्माण सामग्री तक उखड़ गई है।

चेतावनी: ‘अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे बड़ी लड़ाई है’

प्रदर्शन के अंत में स्थानीय संघर्ष समिति ने नगर निगम प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर सीवर सफाई, कूड़ा निस्तारण और टूटी सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह ‘ढोल-मंजीरा’ प्रदर्शन नगर निगम मुख्यालय (मोतीझील) की दहलीज तक पहुंचेगा। लोगों ने यहाँ तक कहा कि यदि समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनावों के बहिष्कार और सामूहिक धरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

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