नई दिल्ली | भारतीय घरेलू बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में पिछले वित्त वर्ष के दौरान जो जबरदस्त उछाल देखा गया था, उसके अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की संभावना है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में तेजी तो आएगी, लेकिन किसी ‘महा-उछाल’ या एतिहासिक छलांग की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
पिछले वित्त वर्ष का प्रदर्शन: चांदी ने मारी बाजी
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चांदी निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिटर्न देने वाली धातु बनकर उभरी। चांदी की कीमतों में लगभग 142 प्रतिशत की एतिहासिक तेजी दर्ज की गई, जबकि सोने ने भी पीछे न रहते हुए करीब 67 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया। 1 अप्रैल, 2025 को चांदी का भाव ₹99,461 प्रति किलो था, जो साल के अंत तक ₹1,41,431 के पार पहुंच गया।
क्या हैं तेजी के मुख्य कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (खासकर ईरान-इजरायल और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर) सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को बढ़ावा दे रहा है।
- सेंट्रल बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहे हैं।
- वैश्विक मंदी का डर: आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक शेयरों के मुकाबले सोने-चांदी को अधिक सुरक्षित मान रहे हैं।
- करेंसी में उतार-चढ़ाव: डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी घरेलू कीमतों को प्रभावित कर रही है।
भविष्य का अनुमान: ₹3.5 लाख तक पहुंच सकती है चांदी?
चॉइस ब्रोकिंग के एनालिस्ट आमिर मकदा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दृष्टिकोण ‘मध्यम तेजी’ वाला है। ऊँची ब्याज दरें कीमतों को एक सीमित दायरे में बांध सकती हैं। चांदी की कीमतें करेंसी के उतार-चढ़ाव के आधार पर ₹2.75 लाख से ₹3.5 लाख प्रति किलोग्राम के बीच रहने की संभावना है।
