कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के दावों की पोल खोल दी है। शिवली कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत रूरा-शिवली मार्ग पर कडरी गांव के पास एक गहरा, पानी से भरा गड्ढा एक होनहार युवक के लिए काल बन गया। 25 वर्षीय धीरेंद्र कुमार, जो पनकी पावर हाउस में प्राइवेट वेल्डर के रूप में कार्यरत था, मंगलवार की रात ड्यूटी से घर लौटते समय इस खौफनाक हादसे का शिकार हो गया।
अंधेरी रात और सड़क पर स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण धीरेंद्र को सड़क किनारे खुदा यह विशाल गड्ढा दिखाई नहीं दिया। उसकी बाइक अनियंत्रित होकर सीधे पानी और कीचड़ से भरे इस ‘डेथ ट्रैप’ में जा गिरी।
दर्दनाक रात: 12 घंटे तक दलदल और ठंड से लड़ता रहा ‘धीरेंद्र’
हादसा इतना भीषण था कि बाइक के नीचे धीरेंद्र का पैर दब गया और वह कीचड़ भरे दलदल से बाहर नहीं निकल सका। कड़ाके की ठंड और सुनसान सड़क होने के कारण उसकी चीखें किसी ने नहीं सुनीं।
- तड़पता रहा युवक: धीरेंद्र पूरी रात उस जमे हुए पानी और कीचड़ में फंसा रहा। ठंड के कारण उसका शरीर धीरे-धीरे अकड़ता गया।
- सुबह का खौफनाक दृश्य: बुधवार सुबह जब स्थानीय किसान अपने खेतों की ओर निकले, तो उनकी नजर कीचड़ में दबे एक युवक पर पड़ी। युवक के पैर में हल्की हलचल देख ग्रामीणों ने तुरंत शोर मचाया और उसे बाहर निकालने की मशक्कत शुरू की।
ग्रामीणों ने की बचाने की कोशिश, पर किस्मत को कुछ और मंजूर था
ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए तुरंत कीचड़ में उतरकर बाइक हटाई और धीरेंद्र को बाहर निकाला। उसके शरीर को गर्मी देने के लिए पुआल जलाकर आग सेंकी गई और उसका चेहरा साफ किया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे तुरंत सीएचसी शिवली भेजा, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।
सिस्टम पर सवाल: आखिर किसकी थी ये जिम्मेदारी?
इस घटना ने क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण या मरम्मत के नाम पर खोदे गए इन गड्ढों को बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के छोड़ दिया जाता है।
“अगर उस गड्ढे के चारों तरफ कोई संकेतक होता या सड़क पर लाइट होती, तो आज एक मां का लाल जिंदा होता। यह हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है।” — स्थानीय निवासी
