भारत के एमएसएमई और व्यापारिक तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने देशभर के व्यापारियों और छोटे व्यवसायों में कानूनों, नियमों और विनियमों के समय पर पालन को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त पहल करने की घोषणा की है। दोनों संस्थाओं ने शीघ्र ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर राष्ट्रव्यापी जागरूकता एवं क्षमता-वृद्धि अभियान प्रारंभ करने पर सहमति व्यक्त की है—यह जानकारी चाँदनी चौक के सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने दी।
नई दिल्ली में आयोजित कैट के नेशनल ट्रेड लीडर्स कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए ICAI के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चरनजोत सिंह नंदा ने कहा कि ICAI और कैट की यह साझेदारी भारत के एमएसएमई समुदाय की वित्तीय और परिचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षमता निर्माण, वित्तीय अनुशासन, कौशल विकास और लेखा प्रणाली में पारदर्शिता—ये सभी एमएसएमई को आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बनाने के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
इस दौरान प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में अनुपालन केवल कानूनी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि व्यापार की विश्वसनीयता, प्रतिस्पर्धात्मकता और दीर्घकालिक स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बताया कि जीएसटी, आयकर, डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग और वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों की बेहतर समझ से लाखों व्यापारी और छोटे व्यवसाय लाभान्वित होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विज़न का उल्लेख करते हुए श्री नंदा ने कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए मौजूदा व्यापार प्रथाओं में व्यापक बदलाव लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “घरेलू और वैश्विक बाज़ारों में प्रभावी प्रतिस्पर्धा के लिए व्यापारियों को आधुनिक प्रणालियों को अपनाना होगा, डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ाना होगा और अपने कौशल में सुधार करना होगा। तभी वे भारत की विकास यात्रा में समान भागीदार बन सकेंगे।”
श्री खंडेलवाल ने डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बढ़ती डिजिटल पेमेंट्स, ई-इनवॉइसिंग, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन वित्तीय प्रणालियों के दौर में व्यापारियों का डिजिटल रूप से दक्ष होना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और तकनीक-सक्षम कार्यबल ही भारत के आर्थिक विस्तार के अगले चरण में सफलता की कुंजी है, और ICAI अपनी राष्ट्रीय नेटवर्क क्षमता के साथ व्यापारियों को इस ज्ञान और जागरूकता से सशक्त बनाने में कैट की मदद करेगा।
आईसीएआई एवं कैट का संयुक्त अभियान निम्न प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा:
• व्यापारियों और एमएसएमई के लिए क़ानून पालन व लेखा मानकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम
• डिजिटल टूल्स, फिनटेक समाधान और ऑनलाइन बिज़नेस संचालन पर कार्यशालाएँ
• वित्तीय पारदर्शिता और रिकॉर्ड-कीपिंग पर जागरूकता अभियान
• युवा उद्यमियों और कार्यबल के लिए कौशल विकास मॉड्यूल
• विकसित भारत 2047 में एमएसएमई के योगदान को सशक्त करना
श्री खंडेलवाल ने आईसीएआई के समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि कैट देशभर के व्यापार संगठनों, बाज़ार संघों और छोटे व्यवसायों को इस अभियान से जोड़ कर देश के व्यापार को मजबूत बनाएगा । दोनों संगठनों के बीच होने वाले MOU इस राष्ट्रीय साझेदारी को औपचारिक रूप देगा और देश के व्यापारिक समुदाय के लिए सबसे बड़े समन्वित जन-जागरूकता कार्यक्रमों में से एक का मार्ग प्रशस्त करेगा।