भारत सरकार ने लीबिया में अपना नया राजदूत नियुक्त कर दिया है। चाड में भारत के मौजूदा राजदूत डॉ. हिफ्जुर रहमान को अब लीबिया में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वह जल्द ही त्रिपोली में अपना नया कार्यभार संभालेंगे।
🔹 मध्य पूर्व और अफ्रीका में गहरा कूटनीतिक अनुभव
डॉ. रहमान का करियर लंबे समय से मध्य पूर्व से जुड़ा रहा है। वह सऊदी अरब, सीरिया और ट्यूनीशिया में राजनयिक पदों पर सेवाएं दे चुके हैं, जिसके चलते उन्हें अरब जगत की राजनीति, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की गहरी समझ है।
एक राजनयिक होने के साथ-साथ उनके पास प्रशासन, व्यापार, वाणिज्य और सांस्कृतिक मामलों में भी व्यापक अनुभव है।
अफ्रीकी महाद्वीप में भी उनकी पकड़ मजबूत है। चाड में भारतीय राजदूत रहते हुए उन्होंने अफ्रीकी राजनीतिक प्रणाली और सामाजिक-आर्थिक हालात को नजदीक से समझा। यही अनुभव अब भारत-लीबिया संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
🔹 लीबिया में भारतीय राजदूत की बड़ी जिम्मेदारियाँ
- लीबिया भारत के लिए कई दृष्टि से अहम देश है।
भारत की प्राथमिकताओं में प्रमुख हैं: - वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा,
- ऊर्जा एवं तेल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना,
- द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में सुधार।
लीबिया अफ्रीका का बड़ा तेल उत्पादक देश है। ऐसे में डॉ. रहमान का अनुभव ऊर्जा संबंधों को स्थिर और मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है।
🔹 चुनौती: लीबिया की अस्थिर राजनीतिक स्थिति
लीबिया में लंबे समय से मिलिशिया संघर्ष, बाहरी हस्तक्षेप और राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। ऐसी परिस्थितियों में भारतीय राजदूत के लिए कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा। भारत का उद्देश्य है कि अस्थिर माहौल के बावजूद अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया जाए।
🔹 भारत–लीबिया व्यापार में सुधार की उम्मीद
कई भारतीय कंपनियाँ लीबिया में
इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, तेल-गैस, पावर, निर्माण, हाउसिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा, सड़कों और ट्रांसमिशन लाइन्स जैसे क्षेत्रों में काम कर चुकी हैं।
2011–2019 के गृह संघर्ष के दौरान इन प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान हुआ और व्यापार लगभग ठप हो गया।
हालांकि 2024–2025 में भारतीय दूतावास के दोबारा सक्रिय होने और भारतीयों की वापसी से माहौल बेहतर हुआ है। उम्मीद है कि डॉ. रहमान की नियुक्ति के बाद
पुराने प्रोजेक्ट्स दोबारा शुरू हो सकते हैं,
नए समझौते हो सकते हैं,
और व्यापारिक संबंधों में नई ऊर्जा आएगी।