नोएडा में बिल्डर की लापरवाही ने ली इंजीनियर की जान: दो कंपनियों पर FIR, 3000 करोड़ का बकाया और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी – NewsKranti

नोएडा में बिल्डर की लापरवाही ने ली इंजीनियर की जान: दो कंपनियों पर FIR, 3000 करोड़ का बकाया और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी

नोएडा के सेक्टर-150 में एक दर्दनाक हादसे में एक इंजीनियर की मौत हो गई। जांच में पता चला कि बिल्डर कंपनियों ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा था। साथ ही, इन कंपनियों पर नोएडा प्राधिकरण का भारी कर्ज भी है।

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Highlights
  • हादसा: सेक्टर-150, नोएडा की निर्माणाधीन साइट पर इंजीनियर की मौत।
  • कार्रवाई: दो बड़ी बिल्डर कंपनियों पर एफआईआर दर्ज।
  • बकाया: नोएडा प्राधिकरण का इन कंपनियों पर 3000 करोड़ रुपये बकाया।
  • जांच: सीबीआई और ईडी ने शुरू की घोटाले की जांच।
  • लापरवाही: साइट पर सुरक्षा उपकरणों और चेतावनी संकेतों का अभाव।

नोएडा |

नोएडा के पॉश इलाके सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट पर हुई इंजीनियर की मौत ने नोएडा प्राधिकरण और निजी बिल्डर कंपनियों के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इन कंपनियों पर प्राधिकरण का लगभग 3000 करोड़ रुपये का बकाया है, फिर भी वहां अवैध रूप से निर्माण और बिक्री का खेल जारी था।

सुरक्षा मानकों का मखौल

हादसे वाली जगह का मुआयना करने पर पाया गया कि साइट पर सुरक्षा के न्यूनतम इंतजाम भी नहीं थे। न तो कोई सेफ्टी बैरिकेड्स लगाए गए थे और न ही किसी प्रकार के चेतावनी बोर्ड मौजूद थे। इसी लापरवाही के कारण इंजीनियर ने अपनी जान गंवाई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि प्राधिकरण समय पर बकाया वसूली और सख्त निगरानी करता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।

स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर खेल

7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को ‘स्पोर्ट्स सिटी परियोजना’ के लिए यह जमीन आवंटित की गई थी। नियमों के अनुसार, यहां खेल सुविधाओं का विकास होना था, लेकिन बिल्डर ने अवैध रूप से जमीन के छोटे-छोटे हिस्से कर अन्य संस्थाओं और लोगों को बेच दिए। इससे न केवल सरकारी खजाने को चोट पहुंची बल्कि परियोजना का मूल उद्देश्य भी खत्म हो गया।

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सीबीआई और ईडी की एंट्री

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गए हैं। जांच एजेंसियां इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि कैसे हजारों करोड़ का बकाया होने के बावजूद निर्माण जारी रहा और नियमों के विरुद्ध जमीन की बंदरबांट की गई।

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